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भारत के पूर्व विदेश सचिव शिंवशंकर मेनन का कहना है कि पाकिस्‍तान की मौजूूदा राजनीति ऐसी नहीं है कि भारत उससे सामान्‍य संबंध बनाए रख सके। दोनों परमाणु संपन्‍न देश एक दूसरे की निगाह में आज सबसे बड़े दुश्‍मन हैं। ऐसे में संबंधों को बनाए रखना संभव नहींं है।

न्‍यूयार्क के साउथ एशियन सेंटर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्‍होंने भारत-पाक पर पूछे गए सवालों के जवाब में यह बात कही।

कश्‍मीर रिजोल्‍यूशन पर पूछे गए सवालों को खारिज करते हुए उन्‍होंने कहा कि कश्‍मीर को लेकर कई सारे मुद्दे वर्षों से अनसुलझे पड़े हुए हैं। पूर्व राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मेनन ने कहा कि इनमें से कई मुद्दे ऐसे हैं जिन्‍हें सुलझाया जा सकता है, लेकिन राजनीतिक परेशानियों के चलते यह भी नहीं हो पाता है। उन्‍होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में पाकिस्‍तान से संबंध बनाए रखना बेहद मुश्किल है। इसकी वजह वहां का इंस्टिट्यूशन है, जो ऐसा नहीं करने देना चाहता है।

मेनन ने कहा कि भारत में संबंधों को बेहतर बनाने काेे लेकर उम्‍मीद लगभग न के बराबर है। खासतौर पर 26/11 में मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद यह और कम हो गई है। उन्‍होंने कहा कि बेहद कम लोग हैं जो पाकिस्‍तान से संबंधों को सुधारकर मुद्दों को हल करना चाहते हैं। वह यह भी मानते हैं कि सीमा पर से की जा रही आतंकी कार्रवाई से किसी का भला नहीं होने वाला है। उन्‍होंने कहा कि यमन, सीरिया और रूस से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर भारत की सोच अमेरिका से काफी भिन्‍न है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थाई सीट को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा कि भारत इस पर तवज्‍जो नहीं दे रहा है, न ही इसको लेकर वह चिंतित है। उन्‍होंने इस बाबत अपनी राय देते हुए कहा कि यूएनएससी एक ब्‍यूटी कॉटेंस्‍ट है, जहां किसी ब्‍यूटी को जिताया जाता है। इसके कोई मायने नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि जरूरी यह है कि अमेरिका के साथ सामंजस्‍य बैठाते हुए भारत को आगे बढ़ने के‍ लिए बेहतर वातावरण तैयार करना होगा। यही अमेरिका के लिए भी सही होगा।

 

मौजूदा हालात में पाक से संबंध बनाए रखना मुश्किल: मेनन

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