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पांच माह कीरिशिता घर जाने को तैयार है और अब वह 2.5 किलो की हो गयी है। लेकिन प्रीमेच्योर रिशिता जब जन्मी थी तब उसका वजन एक मोबाइल के वजन के बराबर मात्र 650 ग्राम था। उसके डॉक्टर धमेरा का मानना है उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा है कि वह जीवित है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कितनी कमी होती है हम सभी जानते हैं ऐसी स्थिति में तेलंगाना के पिछड़े नालगोंडा क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों ने करिश्मा कर दिखाया है।

ये कोई रिकॉर्ड बनाने से कमतर नहीं है। रिशिता के डॉक्टर धमेरा बताते हैं कि जब पांच माह पूर्व रिशिता को अस्पताल लाया गया था तब उसके बचने की उम्मीद बहुत कम होने के चलते डॉक्टर उसे दाखिल करने से हिचकिचा रहे थे। दरअसल 1.2 किलो से कम वजन के नवजात को दाखिल नहीं किया जाता, लेकिन उसके मातापिता बहुत गरीब थे और वह एक बच्ची थी इसलिए हमने उसे दाखिल करलिया।

 डॉक्टर के अनुसार उसके परिजनों ने पहले हफ्ते उसकी बिल्कुल सुद ही नहीं ली ये देख मैं घबरा गया और उन्हें फोन किया। हालांकि कुछ हफ्तों की मेहनत और कंगारू केयर के बाद उसकी तबियत में सुधार दिखने लगा। उसकी तबियत को देखते हुए 26 बच्चों पर 24 नर्सों के दबाव के बावजूद हमने एक नर्स बच्ची के लिए नियुक्त कर दी थी। इसके अलावा रिशिता की देखभाल के लिए हमने बहुत मेहनत की और अब वह सुनने, देखने के साथ शारीरिक तौर पर बढ़ रही है।

 रिशिता की दादी मलम्मा का मानना है कि डॉक्टरों ने करिश्मा कर दिखाया है। उन्होंने मां की तरह बच्ची की देखभाल की है और हमारी आशा से कहीं ज्यादा है। उन्होंने हमें कंगारू केयर का जो तरीका बताया वह भी नायाब है। रिशिता की मां ममथा का कहना है कि उन्होंने तो आशा ही खो दी थी, लेकिन डॉक्टरों के समझाने के बाद ही वह बच्ची की देखभाल सही तरीके से कर सकी।

मोबाइल के वजन के बराबर जन्मी बच्ची

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