केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि वह अगले वित्त वर्ष तक 44 लाख लोगों के सिर पर सिर्फ छत ही उपलब्ध नहीं कराना चाहती है, बल्कि इन घरों में एलपीजी, पानी और बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध कराना चाहती है। ग्रामीण विकास सचिव अमरजीत सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सरकार मैदानी इलाकों में लाभार्थी के खाते में करीब 1.30 लाख रुपये और पहाड़ी इलाके में लाभार्थी के खाते में करीब 1.50 लाख रुपये डालेगी। इसके अलावा सभी लाभार्थियों को शौचालय बनाने के लिए 12 हजार रुपये अलग से दिए जाएंगे।

साथ ही उन्हें अपना मकान बनाने के लिए मनरेगा के तहत 90 दिन का रोजगार दिया जाएगा, जिसकी मजदूरी लगभग 18 हजार रुपये होगी। पहले अगले वित्त वर्ष तक 33 लाख लोगों को घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 44 लाख कर दिया गया है।

सिन्हा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बेघर लोगों को घर और कच्चे घर में रहने वालों को पक्का घर उपलब्ध कराना है। केंद्र सरकार ने राज्यों से अपील की है कि वे भूमिहीन लोगों को घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराए। अनुमान के मुताबिक ये घर जिन लोगों के लिए बनाए जाने हैं उनमें 60 फीसदी लोग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के होंगे।

सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों के चयन और पुष्टि का काम पूरा हो चुका है। योजना को डीबीटी मोड पर लागू किया जाएगा। घर बनाने के लिए दी जाने वाली राशि को तीन साल में किस्तों में लाभार्थी के खाते में सीधे हस्तांतरित किया जाएगा। इस काम में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार फंड का दुरुपयोग रोकने के लिए सभी जरूरी उपाय कर रही है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फंड किसी ऐसे व्यक्ति को न मिल जाए जिसका नाम सूची में नहीं है।

 

मोदी सरकार करेगी 44 लाख लोगों के घर का सपना पूरा

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