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नई दिल्ली। एक तरफ जहां पूरा देश विजयदशमी के दिन रावण का पुतला दहन कर रहा था, वहीं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रावण के रूप में पुतला बनाकर दहन किया।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, सांसद योगी आदित्यनाथ, साध्वी प्रज्ञा, बाबा रामदेव, आशाराम तथा जेएनयू कुलपति को रावण के दस चेहरे के रूप में प्रदर्शित किया गया था। पुतला दहन से पहले एनएसयूआई के नेता सनी धीमान ने छात्रों को संबोधित किया था।

जेएनयू कुलपति प्रो. एम जगदीश ने ट्वीट कर कहा है कि पुलता दहन की हमें जानकारी है। हम इस मामले की छानबीन करेंगे। वहीं, इस संबंध में धीमान ने कहा कि पीएम मोदी को बुराई के प्रतीक रावण की तरह दर्शाते हुए उनका पुतला फूंका गया है। पुतला सभी मोर्चों पर सरकार की विफलता को दर्शाने के लिए जलाया गया।

यह प्रदर्शन गोरक्षा के नाम पर मुस्लिमों और दलितों पर अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे यूथ फोरम फॉर डिस्कशंस एंड वेलफेयर एक्टिविटीज को नोटिस जारी करने के जेएनयू प्रशासन के फैसले के खिलाफ था। कुछ छात्रों ने गुजरात सरकार और गोरक्षकों का पुतला जलाया।

सनी धीमान ने कहा कि विश्वविद्यालय बहस की जगह है, भजन गाने की जगह नहीं है। यहां पूर्व में भी पुतले जलाए गए, लेकिन किसी छात्र को नोटिस नहीं दिया गया। विजयदशमी के दिन बाबा साहब अंबेडकर ने बौद्ध धर्म को स्वीकारा था।

प्रधानमंत्री ने अंबेडकर के चेहरे का तो खूब प्रचार किया, लेकिन उनके विचारों को आगे नहीं बढ़ाया। साबरमती ढाबा के निकट आयोजित इस पुतला दहन कार्यक्रम से थोड़ी दूर पर एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के कार्यकर्ता एनएसयूआई के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

जेएनयू में एबीवीपी के नेता सौरभ कुमार शर्मा ने कहा कि कांग्रेस और एनएसयूआई अपने पतन की ओर हैं, ऐसे में उनके नेता चर्चा में बने रहने के लिए इस तरह की ओछी हरकत कर रहे हैं। साथ ही देश के लोगों की भावनाएं आहत कर रहे हैं।

 

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