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बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान जानवरों की कुर्बानी को लेकर दिए अपने बयान पर कायम हैं। शुक्रवार को एक फेसबुक पोस्ट में इरफान खान ने लिखा, ‘प्लीज भाइयों, जो मेरे बयान से दुखी हैं, या तो वो आत्मविश्लेषण के लिए तैयार नहीं है या नतीजे पर पहुंचने की जल्दी में हैं। मेरे लिए धर्म व्यक्तिगत आत्मविश्लेषण के बारे में है। ये करुणा, ज्ञान और संयम का स्रोत है न की कट्टरपंथ और रूढ़िवाद का।’

उन्होंने लिखा, ‘मैं धर्मगुरुओं से नहीं डरता। खुदा का शुक्र है कि मैं ऐसे देश में नहीं रहता जहां धार्मिक ठेकेदारों का राज नहीं चलता।’ इरफान खान ने अपनी फिल्म मदारी के प्रोमोशन के दौरान कहा था, “क़ुर्बानी का मतलब अपनी कोई प्यारी चीज क़ुर्बान करना होता है। ये नहीं कि बाजार से आप कोई दो बकरे खरीद लाएं और उनको कुर्बान कर दें।’

उन्होंने कहा था, ‘हमारी बहुत सी परंपराएं हैं, बहुत से त्यौहार हैं लेकिन हम त्यौहारों के असली मायने भूल गए हैं। मैं कहता हूँ कि हमें परंपराओं और त्यौहारों के मायने समझने होंगे और ये समझना होगा कि वो क्यों मनाए जाते हैं।’

इरफान खान के बयान की कुछ लोगों ने आलोचना की थी। लेकिन इरफान के ताजा पोस्ट पर उन्हें खूब समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर उनका स्टेट्स भी पोस्ट किए जाने के आधे घंटे की भीतर ही चार सौ से ज्यादा बार शेयर किया गया।

पीयूष दीक्षित ने टिप्पणी की, ‘ये सभी धर्मों के बारे में सही है, शायद ये धर्मों से आगे बढ़कर और भारतीय होकर सोचने का वक्त है। धर्म के नाम पर देश बर्बाद हो रहा है। ‘वहीं अथर आलम ने लिखा, ‘मैं आपका प्रशंसक हूँ लेकिन इस विषय पर आपको समझना होगा कि कुर्बानी कैसे शुरू हुई और कुर्बानी के बाद इस्लाम के अनुसार क्या किया जाना चाहिए।’

मैं धर्म के ठेकेदारों से नहीं डरता: इरफान

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
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