मेट्रो के डिपो के भीतर बिछाई गई ट्रैक

मेट्रो ट्रायल एक दिसंबर को होना है जिसकी लगभग तैयारियां पूरी कर ली गई है । ट्रायल मेट्रो के डिपो के भीतर बिछाई गई मेट्रो ट्रैक पर किया जाएगा। करीब 700 मीटर के ट्रैक पर ट्रायल किया जाएगा । वही चेन्नई से मेट्रो कोच डिस्पैच होकर रवाना हो गए है जो 21 तारीख तक लखनऊ राजधानी आ जाएंगें ।
डिपो को बनाया गया इकोफ्रेडली
– डिपो को इको फ्रेडली बनाया गया है जो की प्रदूषण से मुक्त है। यहां पर एक मेगावाट क्षमता का सोलर पैनल लगाया है।
– जिससे यहां की बिजली की 80 फीसदी जरुरतें पूरी होगी। पूरे डिपो में मोटर व्हीकल को बैन किया गया है।
46 एकड़ में बना है डिपो
– मेट्रो के डिपोको 46 एकड में बनाया गया है। इसे दो पार्ट में किया गया है।
– एक पार्ट में गाडियों की सफाई और मेटेंनेंस का काम होगा । उन्होने बताया कि किसी मेट्रो ट्रेन का चार साल बाद मेजर मेटीनेंस होता है। इसके बाद 16 और 32 साल पर होता है।
– एलएमआरसी के जीएम सुशील कुमार ने बताया कि मेट्रो रेल की उम्र 35 साल होती है।
– जबकि कोच का वजन 40 से 42 टन होता है। एक मेट्रो ट्रेन आठ से दस लाख किलोमीटर तक चलती है।
मेट्रो ट्रायल होगा डिपो के अंदर
– उन्होंंने कहा कि एक दिसंबर को मेट्रो का ट्रायल डिपो के अंदर किया जाएगा।
– जिसके लिए 700 मीटर लंबा विशेष मेट्रो ट्रैक डिपो के अंदर बनाया गया है।
– यहां पर टेस्ट के बाद ही मेट्रो को मेन ट्रैक पर दौडाया जाएगा। ये काम कुछ दिन बाद किया जाएगा।
सोलर पैनल से जनरेट होगी बिजली
– उन्होंंने कहा कि यहां पर एक मेगावाट बिजली लगाए गए सोलर पैनल से जनरेट होगी।
– जिससे पूरा मेटेनेंस का काम होगा । यहां पर मोटर व्हीकल बैन होने से लोग आने जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करेगें।
– अन्यथा उन्हे बैट्री वाहन का इस्तेमाल करना पडेगा।
रेस्क्यू व्हीकल ट्रैक के साथ दौड़ेगा
– उन्होंने बताया कि मेट्रो रेल में अगर कोई खराबी आ जाये या फिर कोई दुघर्टना हो तो उसके लिए रेस्क्यू व्हीकल होंगे।
– ये व्हीकल सडक़ और मेट्रो ट्रैक दोनों पर चल सकेंगे।
– जिससे अगर दुघर्टना के दौरान एक के पीछे एक गाड़ी होगी तो रेसक्यू करने के लिए सडक़ मार्ग से भी जाया जा सकेगा।
कई और बनेंंगे रिकार्ड
– एलएमआरसी मेट्रो के तेजी से निर्माण के अलावा अनेक तरीकों से रिकार्ड बनाने का इच्छुक है।
– यहां डिपो में पहली बार शानदार एयर वेंटीलेशन सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है।
– जिससे डिपो बहुत अधिक गर्म नहीं होगा।
– अधिकांश उपकरण भारत में बने हुए हैं। जिससे कास्टिंग बहुत कम हो गई है।
डिपो में होगी इंटरलॉकिंग सिस्टम
– डिपो प्रकाश व्यवस्था के लिए टावर लगाए गए हैं।
– मदर डिपो इंटरलॉकिंग सिस्टम पर है।
– डिपो क्षेत्र में ट्रेनों की आवाजाही के लिए सुरक्षित मेनलाइन से अलग है।
– रेडियो और वायरलेस के लिए के लिए अलग से टेलीकॉम टावर बनाए गए हैं।
– एक डीजी आपातकालीन बैक अप है। 500 केवीए का सब.स्टेशन बनाया गया है।

मेट्रो डिपो की सभी तैयारियां पूरी, एक दिसंबर को होगा ट्रायल

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