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चीन में रोजे पर पाबंदी लगाए जाने के विरोध में इस बार मुस्लिम समुदाय ने चाइनीज सामानों का बहिष्कार कर दिया है। खासकर टोपी का। दुकानदारों ने भी इस बार थोक मंडी से कोई चाइनीज सामान नहीं उठाया। जिन दुकानदारों के पास पहले से चाइनीज सामान था उसकी भी बिक्री नहीं हुई। दूसरी तरफ पाकिस्तान, इंडोनेशिया, ओमान और मस्कती में बनीं टोपी खूब बिक रही हैं।

इस बार चीन की सरकार ने अपने देश में रोजे पर पाबंदी लगा दी है। इसका विरोध भारत में कई जगह हुआ। बरेली के कई संगठनों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेज कर इस मामले में चीन की सरकार से बात करने की मांग की थी। रोजे पर रोक के विरोध में बरेली के दुकानदारों ने चाइना का माल नहीं उठाया।

टोपी के अलावा दूसरे इस्लामी आइटम खासतौर से कार हैंगिंग, तसबीह, तुगरे, घड़ी आदि बिलकुल नहीं खरीदे गए। लोगों ने चाइनीज सामान से पूरी तरह परहेज करने की कोशिश की।

दरगाह ए आला हजरत के पास बनी मार्केट के दुकानदार हाफिज मोहम्मद आमिर रजा ने बताया कि पिछली बार इस मार्केट में लगभग एक लाख रुपये की चाइनीज टोपी बिकी थीं। अन्य सामान भी खूब बिके थे।

आंकड़े पर बात करें तो लगभग तीन लाख रुपये का कारोबार चाइनीज सामान से हुआ था। हाफिज मोहम्मद आमिर रजा ने यह भी बताया कि इस बार ओमान और मस्कत से आने वाली बरकाती टोपी खूब बिक रही हैं।

इसके अलावा ताजु्श्शरिया, अजहरी व रामपुरी टोपी की भी खास मांग है। ईद के लिए बांग्लादेशी और तुर्की टोपी भी पसंद की जा रही है।

मुस्लिम समाज ने किया ‘मेड इन चाइना’ का बहिष्कार

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