लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 15 जिलों की 73 सीटों के लिए मतदान शुरू हो चुका है। इनमें दंगों का दंश झेल चुके मुदफ्फरनगर के अलावा सुर्खियों में रहे बिसहड़ा की सीटों पर भी मतदान हो रहा है। प्रदेश के इस हिस्से में उम्मीदवारों का भविष्य काफी कुछ मुस्लिम मतदाताओं के हाथ होगा।

यहां कुल 28 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं जो अपने वोट से उम्मीदवारों की तकदीर ईवीएम मशीन में बंद करेंगे। पार्टियों के इस बड़े आकड़े का पूरा भान है और यही कारण है कि किसी भी दल नें यहां मुस्लिम मतदाताओं के लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

जिन पंद्रह जिलों में पहले चरण के लिए मतदान हो रहा है उनमें शामली, बागपत, अलीगढ़, हापुड़, बुलंदशहर, फिरोजाबाद और गाजियाबाद जैसे बड़े जिले शामिल हैं और यहां पर मुस्लिमों की आबादी भी अच्‍छी खासी है।

मुजफ्फरनगर और मेरठ के आसपास के इलाकों में ही मुस्लिमों की आबादी 35 से 45 प्रतिशत तक है। अगर देखें तो मुजफ्फरनगर में 38.09 प्रतिशत, मेरठ में 32.81 प्रतिशत, बागपत में 24.73 प्रतिशत, गाज़ियाबाद में 23.73 प्रतिशत और अलीगढ़ में 17.78 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं।

इन सीटों पर बड़ा दांव खेलते हुए बसपा ने जहां 140 विधानसभा सीटों पर 50 उम्मीदवार उतारे हैं। दूसरी तरफ एसपी-कांग्रेस ने भी मुस्लिमों की ताकत को देखते हुए 42 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। सबसे खास बात ये हैं कि पश्चिमी यूपी की कुल 140 सीटों में 26 सीटें ऐसी है जहां सपा और बसपा ने मुस्लिम प्रत्‍याशी मैदान में उतारे हैं।

मुस्लिम मतदाताओं के हाथ होगा नेताओं का भविष्य

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