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केंद्रीय कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने मंगलवार को कहा कि मुसलमानों को आतंकवाद के झूठे मामलों में फंसाना चिंता की बात है। उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम युवाओं के खिलाफ आतंक के झूठे केस लगाए जाने से वह चिंतित है और उन्हें बाद में सबूत ना होने की वजह से रिहा कर दिया जाता है।’ उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए कानून में सुधार किया जा रहा है।

कानून मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के दो साल पूरे होने पर आयोजित ‘विकास पर्व’ नाम के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अलीगढ़ आए हुए थे। मुस्लिम युवाओं पर आतंक के झूठे आरोप लगाए जाने और उनकी रिहाई के बाद उनके सामने आने वाली कठिनाइयों के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए कानून मंत्री ने कहा, ‘आतंकवाद के झूठे आरोपों के आधार पर मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार करना चिंता की बात है। हम इसमें बदलाव लाने के बारे में सोच रहे है। लॉ कमीशन आपराधिक मामलों, जमानत, अभियोजन पक्ष की खामियों जैसे मामलों की कानूनी प्रक्रिया में बदलाव लाने के लिए रिपोर्ट तैयार कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के जज के नेतृत्व में यह रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके साथ ही कई कानून विशेषज्ञ भी रिपोर्ट बनाने में मदद कर रहे हैं।’

गौड़ा से पहले यह मुद्दा पिछले सप्ताह गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी उठाया था। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि सरकार ने आतंकवाद से संबंधित मामलों को लेकर अपने दृष्टिकोण में बदलाव किया है। साथ ही उन्होंने पुलिस को सलाह दी थी कि इन मामलों का निस्तारण ध्यानपूर्वक किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि हाल ही में बाबरी सालगिरह ब्लास्ट मामले में निसाउद्दीन अहमद को 23 साल जेल में गुजारने के बाद बरी कर दिया गया था। इसी तरह अन्य मामलों में अन्य तीन लोगों को भी बरी किया गया था जिनमें आमिर खान भी शामिल है जिसे आतंकवाद के 19 में से 17 मामलों में बरी कर दिया गया था और इस कारण उसे 14 साल जेल में रखा गया था।

मुस्लिमों को आतंकवाद के झूठे मुकदमे में फंसाना चिंता की बात : कानून मंत्री

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