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मुंबई। टाटा ग्रुप के चेयरमैन पोस्ट से हटाए जाने के बाद साइरस मिस्त्री ने मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए टाटा बोर्ड को एक ई-मेल लिखा है। इसमें उन्होंने बोर्ड से कहा कि इस तरह से पद से हटाए जाने से शॉक्ड हूं। मुझे अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि बोर्ड ने अपनी साख के मुताबिक काम नहीं किया। बताया जा रहा है कि बोर्ड मीटिंग के दौरान भी खुद को हटाए जाने को लेकर मिस्त्री ने कहा था कि यह गैर कानूनी तरीका है।

सूत्रो की मानें तो रतन टाटा का यह नहीं सोचा था कि चेयरमैन के निष्कासन की नौबत आएगी। बताया गया था कि टाटा ने स्वयं इस बारे में मिस्त्री से बात की थी। उन्होंने निदेशक बोर्ड के अधिकांश सदस्यों के मत से अवगत कराते हुए यह प्रस्ताव किया था कि वह स्वेच्छा से पद छोड़ दें। हालांकि, मिस्त्री इसके लिए तैयार नहीं हुए।

मिस्त्री को चेयरमैन के पद से हटाने के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया था। हालांकि, कहा जा रहा था कि वह सिर्फ मुनाफे वाली कंपनियों पर ही फोकस कर रहे थे और टाटा की कंपनियों के कई कानूनी मामलों में फंसने के चलते बोर्ड मिस्त्री से नाखुश था।

मिस्त्री को हटाए जाने के बाद 78 साल के रतन टाटा चार महीने के लिए इंटरिम चेयरमैन बन गए हैं। टाटा ग्रुप के  इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि किसी चेयरमैन को बर्खास्त किया गया। मिस्त्री को हटाने से पहले 15 दिन का नोटिस दिया जाना था, जो नहीं दिया गया। इसी के बाद से माना जा रहा था कि कानूनी लड़ाई शुरू होगी।

टाटा समूह ने मंगलवार को सुबह ही सुप्रीम कोर्ट, मुंबई हाई कोर्ट और कंपनी लॉ बोर्ड में एक साथ कैविएट दायर की। समूह ने अर्जी दी कि पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री के निष्कासन को लेकर किसी भी मामले पर सुनवाई से पहले उनकी बात भी सुनी जाए।

 

 

 

 

मुझे काम नहीं करने दिया गया: साइरस मिस्त्री

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