cyrus-mistry_25_10_2016

नई दिल्ली। देश के सबसे प्रतिष्ठित टाटा उद्योग समूह के चेयरमैन साइरस मिस्त्री को सोमवार को अचानक ही उनके पद से हटा दिया गया। मिस्त्री के स्थान पर टाटा समूह के पुराने प्रमुख रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया है। इसके बाद से चर्चा थी कि इस फैसले के खिलाफ मिस्त्री समर्थक पक्ष की ओर से कंपनी पर कोर्ट केस किया जा सकता है। हालांकि मंगलवार को इन अटकलों पर विराम लगाते हुए मिस्त्री ने बयान जारी किया और बताया कि उनका ऐसा कोई विचार नहीं है।

इससे पहले टाटा संस के बोर्ड के फैसले पर आशंका जताई गई थी कि यह पूरा विवाद ही अब कानूनी पचड़े में फंस सकता है। समूह में 18.4 फीसद हिस्सा रखने वाली पारिवारिक शेयरधारक फर्म शपूरजी पलोनजी इस फैसले से खुश नहीं है।

वहीं, निदेशक बोर्ड भी कानूनी लड़ाई के लिए तैयार था। फैसले से पहले टाटा संस के बोर्ड ने देश के कुछ बेहद प्रतिष्ठित वकीलों से राय मशविरा भी किया था। खतरा फिलहाल टल गया है, लेकिन दोनों पक्ष चेयरमैन पद के लिए अदालत जाते हैं, तो यह भी टाटा समूह के इतिहास में पहली बार होता।

मिस्त्री ने अपने बयान में कहा, बीते 24 घंटों में जो कुछ हुआ है, वह संवेदनशील है। चीजों का मूल्यांकन करने के लिए वक्त चाहिए। मीडिया में मुकदमेबाजी को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही हैं, उनका कोई आधार नहीं है।

 

 

मिस्त्री चेयरमैन पद से हटाए जाने के खिलाफ कोर्ट नहीं जाएंगे

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