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नई दिल्ली। साइरस मिस्त्री अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ हस्तक्षेप करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की मदद चाहते हैं। भारत की राजनीतिक राजधानी (दिल्ली) और वित्तीय राजधानी (मुंबई) में इसकी अटकलें मंगलवार की शाम से ही चल रही थीं।

बहरहाल, टाटा समूह से चेयरमैन साइरस मिस्त्री को निष्कासित किए जाने का मामला अदालत के दरवाजे पर पहुंचता नजर आने लगा है। समूह के अंतरिम चेयरमैन रतन टाटा और साइरस मिस्त्री दोनों ही इस बात के संकेत दे चुके हैं कि वे कानूनी लड़ाई भी लड़ने को तैयार हैं।

अध्यक्ष के रूप में मिस्त्री मिस्त्री राजनीतिक प्रतिष्ठान के साथ संबंधों को बनाने में उत्सुक दिखा रहे थे। माना जा रहा था कि वह रतन टाटा के उत्तराधिकारी के रूप में अपने प्रोफाइल को मजबूत करने और समूह के भीतर अपनी स्थिति सुरक्षित करने के लिए ऐसा कर रहे थे।

मंगलवार को दोनों पक्षों ने इस मामले में कानूनी दांवपेच टटोलने शुरू कर दिए। टाटा समूह ने एक साथ देश की प्रमुख अदालतों में कैविएट भी दायर कर दिया है। वहीं, मिस्त्री का खेमा शपूरजी पलोनजी परिवार कानूनी लड़ाई को लेकर गुणा भाग कर रहा है। पलोनजी परिवार इस पर बुधवार को फैसला कर सकता है।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि टाटा समूह ने पहले से ही कई दिग्गज वकीलों से विस्तृत विचार विमर्श के बाद साइरस के निष्कासन का फैसला किया था। मंगलवार को भी कंपनी के वरिष्ठ वकीलों के बीच लगातार विचार विमर्श हुआ है।

 

मिस्त्री चाहते हैं टाटा के मामले में मोदी दें दखल

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