महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सोशल मीडिया में महिलाओं के मुद्दे पर सवाल किए, तो पुरुषों के दर्द इसमें सामने आए। मंत्री के साथ बातचीत में पुरुषों के कथित उत्पीड़न पर सवालों की बाढ़ आ गई।

दरअसल, सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म पर मेनका गांधी नागरिकों के साथ बातचीत कर रही थीं। इस पर कुछ लोगों ने खुद को पिता, तलाकशुदा पति, झूठे दहेज के मामलों और मानवाधिकार कार्यकर्ता बताने वाले पुरुषों के सवालों की झड़ी लगा दी।

पहला सवाल नित्यानंद नायक नाम के एक व्‍यक्‍ित ने पूछा, जिसकी कोई निजी जानकारी एफबी प्रोफाइल पर नहीं दी गई थी। उन्‍होंने पूछा कि आईपीसी की धारा 498 ए के तहत दायर होने वाले फर्जी मामलों में को रोकने के लिए आपकी क्‍या कार्य योजना है। यह धारा विवाहित महिलाओं के प्रति क्रूरता और दहेज मामलों में लगाई जाती है।

मुंबई की एडवर्टाइजिंग एजेंसी में काम करने वाले मनीष वासवानी ने भी इसी मुद्दे पर सवाल किया। उन्‍होंने पूछा कि एक तरफा लिंग आधारित पक्षपाती कानून से जिन निर्दोष लोगों के जीवन नष्ट हो रहा है, उसे रोकने के लिए मंत्रालय क्‍या कर रहा है। मौजूदा सभी नियम पत्नियों के लिए हें। सालियों (सिस्‍टर इन लॉ) की सुरक्षा के लिए क्‍या सुरक्षा है।

मेनकाजी, हम अपनी आंखें खुली रखने और एक व्यापक धारणा की जरूरत है। लाखों लोगों की पीड़ा को अनसुना नहीं किया जा सकता है। इस पर मेनका गांधी ने कहा कि कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग करने वाले लोगों को दंडित करने का नियम मौजूद है।

कई लोगों ने चैटिंग के दौरान सवाला किया कि उनके मंत्रालय में ‘बच्‍चे’ की परिभाषा को सिर्फ ‘लड़कियों’ तक ही क्‍यों सीमित किया गया है। दिल्‍ली की एक फाइनेंस एक्‍िजक्‍यूटिव बरखा त्रेहान ने चैटिंग में कहा कि मैडम मेरा एक बेटा है। मैं महिला एवं बाल विकास विभाग की एक नई नीति को लेकर चिंतित हूं, जो कि लड़कों के साथ पूरी तरह अन्‍यायकारी है।

इस नीति के तहत बच्‍चों को एजुकेशन सिस्‍टम से बाहर कर दिया गया है और उनके लिए रोजगार खोजना मुश्किल होगा। क्‍या मोदी सरकार अच्‍छे दिनों की ब्रांडिंग इसी तरह से कर रही है। क्‍या आप चाहती हैं कि नई पीढ़ी ऐसी पुरुष-विरोधी सरकार को कभी वोट नहीं दे। यदि लड़कों के साथ ऐसा अन्‍याय होगा, तो देश तरक्‍की कैसे करेगा।

 

महिलाओं पर बात कर रही थीं मेनका, छलका पुरुषों का दर्द

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