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कूटनीति उस कॉरिडोर की तरह है, जिसके दरवाजे कभी बंद नहीं होते। इसकी ताजा मिसाल 26 अप्रैल को होने वाली भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की भेंट है। दोनों देशों के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि कर दी है कि मंगलवार को हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन (इस्तांबुल प्रॉसेस) से इतर उनके विदेश सचिवों में द्विपक्षीय चर्चा होगी। उम्मीद है कि इसमें पठानकोट एयरबेस पर हमले का मुद्दा उठेगा।

पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी 26 अप्रैल की सुबह नई दिल्ली आएंगे। वह हैदराबाद हाउस में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके इतर चौधरी विदेश सचिव एस जयशंकर से द्विपक्षीय वार्ता और दोनों ओर से होने वाली समग्र वार्ता (सीबीडी) की प्रगति पर चर्चा करेंगे। दोनों बातचीत रुकी हुई है।

सूत्रों के मुताबिक बातचीत का फोकस पठानकोट हमले की जांच और इसके लिए एनआईए का संभावित पाक दौरा होगा। भारत और पाकिस्तान की ओर से पिछले साल दिसंबर में सीबीडी के ऐलान के बाद दोनों विदेश सचिवों की यह पहली औपचारिक मुलाकात होगी।
इस साल मार्च में दोनों के बीच नेपाल की सार्क बैठक में अनौपचारिक बातचीत हुई थी। इस साल जनवरी में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद विदेश सचिव स्तर पर सीबीडी को जारी रखने की प्रक्रिया रुक गई थी।
दोनों विदेश सचिवों की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत स्थगित होने की  बात कर माहौल गर्मा चुके हैं। हालांकि दोनों विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने बासित के बयान का खंडन किया था।
विदेश सचिव जय शंकर ने भी कहा था कि वार्ता निलंबित नहीं है बल्कि पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता प्रक्रिया को लेकर नियम, शर्तें समेत अन्य मोडेलिटीज तय की जा रही हैं।
1.दोनों विदेश सचिव पठानकोट हमले के बाद पहली बार मिलेंगे।
2. एयरबेस पर हमले के बारे में बातचीत होगी।
3. आतंकी हमले में जांच की प्रगति और पाक के सहयोग पर चर्चा
4. एनआईए के पाकिस्तान जाने को लेकर चर्चा  की पूरी संभावना
5 समग्र वार्ता की प्रक्रिया, मुद्दे, स्वरूप और स्थान को लेकर चर्चा

क्या है भेंट का आशय
दोनों विदेश सचिवों के बीच 30 से 60 मिनट की वार्ता संभव है। समग्र वार्ता की रूपरेखा आदि को तय करने के लिए विदेश सचिव एस जयशंकर को इस्लामाबाद जाना था। अब यह प्रक्रिया एजाज अहमद के साथ नई दिल्ली में पूरी हो जाएगी। लेकिन यह विदेश सचिव स्तरीय वार्ता प्रक्रिया नहीं बल्कि प्री-वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा होगी।

हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन
हार्ट ऑफ एशिया इस्तांबुल प्रॉसेस की शुरुआत 2 नवंबर 2011 को हुई थी। इसका उद्देश्य सुरक्षित और स्थायी अफगानिस्तान के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग को बढ़ाना है। इसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, सऊदी अरब, तजाकिस्तान , तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात समेत कुल 14 सदस्य देश हैं।

अमेरिका समेत कुछ देश पर्यवेक्षक के तौर पर शरीक होते हैं। इस क्रम में पिछला सम्मेलन 9 दिसंबर, 2015 को इस्लामाबाद में हुआ था। इसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हिस्सा लिया था और उसके बाद दोनों देशों के रिश्ते की गाड़ी आगे बढ़ी थी।

भारत-पाक विदेश सचिवों की बातचीत आज

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