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आतंकी संगठन जैशमोहम्मद सरगना मौलाना मसूद अजहर ने चौकाने वाला बयान दिया है। मसूद अजहर ने दावा किया है कि कंधार कांड के बाद भारत ने उसे पैसों से खरीदने की कोशिश की थी।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मसूद अजहर ने दावा किया है कि कंधार कांड के बाद भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने तालिबान से पैसों के एवज में उसे और उसके दो अन्य साथियों को दोबारा भारत को सौंपने की पेशकश की थी। उस वक्त जसवंत सिंह ने ये बात तालिबान के उड्डयन मंत्री रहे मुल्ला अख्तर मोहम्मद मंसूर से की थी। मंसूर की बीते महीने अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत हो गई।

 मसूद अजहर ने अपने दावे मुल्ला मंसूर के शोक संदेश में लिखी है। आतंकी संगठन जैशमोहम्मद के ऑनलाइन पोर्टल अल कलाम वीकली पर मसूद ने ये बातें लिखीं। इसे 3 जून को प्रकाशित किया गया था। मसूद नेसईदी की कलमवाले कॉलम में अपने औपर मंसूर के संबंधों जिक्र करते हुए भारत के खिलाफ बयान लिखा है।

 मसूद अजहर वही आतंकी है जिसे साल 1999 में कंधार विमान अपहरण कांड के बाद यात्रियों को छोड़ने के एवज में भारत सरकार ने 2 अन्य आतंकियों के साथ रिहा किया था।

 मसूद के साथ मुस्ताक अहमद जरगार, अहमद उमर सईद शेख को रिहा किया गया था। मसूद के मुताबिक उस वक्त मुल्ला मंसूर ने उसे लेने एयरपोर्ट पर अपनी सफेद लैंड क्रूजर कार से आया था।

अपने शोक संदेश में मसूद ने लिखा है कि एक बार उसने कंधार एयरपोर्ट पर मुल्ला अख्तर मोहम्मद मंसूर के साथ मीटिंग की थी। एयरपोर्ट उसी के मंत्रालय का हिस्सा था। वो करांची से बतौर शिष्ठ मंडल का सदस्य बनकर आया था।

 तालिबान ने शिष्ठ मंडल को काबुल से कंधार ले जाने के लिए हवाईजहाज की व्यवस्था की थी जहां मुल्ला मंसूर ने शिष्ठ मंडल का स्वागत किया था। मसूद के मुताबिक मुल्ला मंसूर उसे वीआपी लाउंज में ले गया और सामने वाले सोफे पर बैठाने के बाद कहा कि ये वहीं सोफा है जिस पर भारतीय विदेश मंत्री जसवंस सिंह बैठे थे और उन्होंने उसकी गिरफ्तारी के एवज में पैंसों की पेशकश की थी।

 हालांकि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के तत्कालीन प्रमुख एएस दुलत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस पूरे मामले में कहीं भी पैसों की बात नहीं हुई थी।

भारत ने मुझे पकड़ने के लिए तालिबान को पैसे की पेशकश की थ्ाी: अजहर

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