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नई दिल्ली। भारत ने कभी अपनी तरफ से सीजफायर का उल्लंघन नहीं किया, लेकिन पाकिस्तान की हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब जरूर दिया जा रहा है। भारत के पास कई मौके आए जब वह पाकिस्तान पर पहले हमला कर उसका नामो-निशान मिटा सकता था, लेकिन हमारी सरकार ने कभी ऐसा नहीं किया। ऐसा ही एक मौका 1978 में आया था। तब भारत में मोरारजी देसाई की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी विदेशमंत्री थे। जैसा आज भारत के अफगानिस्तान से अच्छे संबंध है, तब भी वैसा ही था। खास बात यह भी थी कि तब का अफगानिस्तान बिल्कुल अलग था। महिलाएं बुर्का नहीं, बल्कि पश्चिमी सभ्यता वाले खुले कपड़े पहनकर सड़कों पर घुमती थीं।

बहरहाल, उसी दौर में अटल बिहारी अफगानिस्तान के दौरे पर गए थे और अन्य नेताओं के साथ वहां के प्रधानमंत्री हफीजुल्लाह अमीन से भी मिले थे। मुलाकात के दौरान अमीन ने अटलजी के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा, जिसे सुनकर भारत चौंक गया।

अमीन चाहते थे कि भारत और अफगानिस्तान मिलकर पाकिस्तान पर हमला कर दे और उसके टुकड़े-टुकड़े कर दे। तब अफगानिस्तान भी पाकिस्तान से नाखुश था।

दोनों देशों के लिए ऐसा करना संभव भी था, क्योंकि तब सोवियत यूनियन का काफी ताकतवार था और पूरी तरह से भारत और अफगानिस्तान के साथ था। यह खुलासा कुलदीप नैय्यर की किताब ‘बियॉन्ड का लाइन्स’ में किया गया है। इसके बाद अफगानिस्तान में सियासी संकट शुरू हो गया और उसके बाद से देश का बिखरना शुरू हो गया।

भारत ने कभी नहीं किया सीजफायर का उल्लंघन

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