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परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने के लिए भारत ने अब अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस क्रम में जहां चीन सहित एनएसजी के सदस्य देशों को साधने के लिए खुद विदेश सचिव सिओल पहुंच गए हैं, वहीं कूटनीतिक मोर्चे पर चीन को साधने का जिम्मा संभालने वालों में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो गए हैं।

पीएम मोदी इस क्रम में ताशकंद में होने वाले शंघाई कोऑपरेशन आर्गेनाइजेशन (एससीओ) की बैठक के इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। इस बीच, भारत को सदस्यता दिलाने की कूटनीतिक मुहिम में अमेरिका, रूस और फ्रांस भी शामिल हो गया है। फ्रांस ने भी अमेरिका और रूस की तरह एनएसजी के सदस्य देशों से भारत के दावे का समर्थन करने की अपील की है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की बौखलाहट और चीन केरुख में दिख रही नरमी से एकबारगी ऐसा लगता है कि इस मोर्चे पर भारत की कूटनीति काम कर रही है। गौरतलब है कि भारत को अगर सिओल में एनएसजी देशों की बृहस्पतिवार से शुरू हो रही बैठक में सफलता नहीं मिली तो उसे इसके लिए दो साल इंतजार करना होगा।

सरकारी सूत्र ने कहा कि एनएसजी में शामिल होने की यह अंतिम कोशिश है, इसलिए भारत ने पूरी ताकत झोंकने केसाथ चीन को मनाने के लिए चौतरफा कूटनीतिक घेराबंदी की है। भारत की ओर से इस मोर्चे पर खुद प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश सचिव मोर्चे पर जुटे हैं। अमेरिका, रूस और फ्रांस भी चीन पर भारत की सदस्यता पर दबाव बना रहा है।

जयशंकर सिओल में चीन के अतिरिक्त अन्य सदस्य देशों को चीन को मनाने केलिए राजी करेंगे। जबकि पीएम मोदी ताशकंद में रूसी राष्ट्रपति के इतर खुद भी चीनी राष्ट्रपति को मनाने की कोशिश करेंगे।
सरकारी सूत्र के मुताबिक फिलहाल स्थिति यह है कि 23 और 24 जून को होने वाली समग्र बैठक के अंतिम दिन भारत की दावेदारी पर चर्चा के आसार बन गए हैं, मगर भारत इसी बैठक में अपनी सदस्यता हासिल करने की मुहिम को परवान चढ़ाना चाहता है।

 

पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नासिर जंजुआ ने आरोप लगाया कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत को शामिल कराने की अमेरिका की कोशिश चीन पर अंकुश लगाने और रूस के उदय को रोकने की एक ‘बड़े खेल’ का हिस्सा है।

जंजुआ ने मंगलवार को एक गोष्ठी में कहा, यह एक ‘बड़ा खेल’ है। उन्होंने कहा कि 48 राष्ट्रों के विशेष परमाणु क्लब में भारत को शामिल करने की अमेरिका की मौजूदा मुहिम को वैश्विक सत्ता के राजनीतिक रुझान के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।

पाकिस्तानी दैनिक एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार जंजुआ ने चीन को थामने, रूस के उदय को रोकने और मुस्लिम जगत को नियंत्रित अराजकता में रखने को मौजूदा वैश्विक राजनीति के अग्रणी रुझान के रूप में गिनाया।

फ्रांस ने किया भारत का खुल कर समर्थन
एनएसजी के लिए चीन की दीवार खड़ी क रने की कोशिश के बीच फ्रांस ने इसकी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन कर दिया है। फ्रांस का कहना है कि भारत को सदस्यता मिलने से परमाणु अप्रसार के लिए दुनिया की कोशिश और मजबूत होगी।

फ्रांस ने सदस्यता के लिए भारत का पक्ष लेते हुए एनएसजी के सदस्य देशों से सिओल की बैठक में सकारात्मक फैसला लेने की अपील की।

48 सदस्यों वाले एनएसजी समूह में कहा गया है कि अगर भारत को इसमें शामिल किया गया तो परमाणु, रसायन, जैविक और बैलिस्टिक या पारंपरिक मैटीरियल और  टेक्नोलॉजी जैसी संवेदनशील चीजों के निर्यात को कंट्रोल करने में आसानी हो जाएगी।

भारत ने एनएसजी की सदस्यता के लिए झोंकी पूरी ताकत

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