नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को पद से हटाने के फैसले के बाद भारत और इंग्लैंड के बीच सीमित ओवरों की सीरीज पर संदेह के बादल छा गए हैं। भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वन-डे सीरीज 15 जनवरी से पुणे में शुरू होनी है।

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिल लोढ़ा समिति की सिफारिशों के संबंध में अपने 18 जुलाई के फैसले को नहीं मानने के चलते बीसीसीआई अध्यक्ष ठाकुर व सचिव शिर्के को पद से हटाया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर बीसीसीआई के अलावा विभिन्न राज्य एसोसिएशनों पर भी पड़ेगा, क्योंकि उन्हें भी लोढ़ा समिति की सिफारिशों को स्वीकारने का हलफनामा दायर करना होगा।

भारत-इंग्लैंड वन-डे सीरीज मात्र दो सप्ताह के अंदर शुरू होनी है और इतने जल्दी सीरीज के सभी मेजबान राज्यों में अधिकारियों को बदलकर संचालन करना आसान नहीं होगा। दो-तीन राज्य एसोसिएशनों को छोड़कर अन्य किसी भी राज्य ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया है।

बीसीसीआई पिछले कुछ समय से इमोशनल कार्ड भी खेल रहा है, वह यह दिखाएगा कि इस फैसले के चलते अब भारत-इंग्लैंड सीरीज पर खतरा रहेगा और अंतररराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की प्रतिष्ठा पर फर्क पड़ेगा।

वैसे सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहेगा कि भारत-इंग्लैंड सीरीज पर कोई असर पडे, इसके चलते वह बीसीसीआई या राज्य एसोसिएशनों को तात्कालिक छूट दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के दौरान मेजबान केंद्र को कुछ फंड रिलीज किया था उसी तरह इस बार उसे फंड जारी करने के अलावा पदाधिकारियों के मामले में भी थोडी छूट देनी होगी।

भारत और इंग्लैंड के बीच सीमित ओवरों की सीरीज पर संदेह के बादल छा गए

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