brahmos-on-border_25_08_2016

बीजिंग। सीमा पर ब्रह्मोस मिसाइल तैनात करने की भारत की योजना से संबंधित खबरों को लेकर चीन बेचैन हो उठा है।

शायद यही वजह है कि चीन की सेना ने गुरुवार को कहा कि भारत को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए, जो सीमा पर स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच बनी आम सहमति के खिलाफ हो।

चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने कहा, “भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण सहमति है। हम उम्मीद करते हैं कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए अपनी ओर से अधिक प्रयास करेगा, न कि वह इससे उलट कार्य करेगा।”

चीन का यह बयान उन खबरों के बीच आया है जिनमें नई दिल्ली स्थित रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत सरकार ने चीन से लगी सीमा पर सेना की क्षमताओं में इजाफा करने के लिए 4,300 करोड़ रुपये की लागत वाली चार ब्रह्मोस रेजीमेंट की तैनाती को मंजूरी दी है।

हर रेजीमेंट में करीब 100 मिसाइलें, पांच मोबाइल स्वचालित लांचर और एक मोबाइल कमान पोस्ट होगी।

ब्रह्मोस मिसाइल को भारत और रूस ने मिलकर तैयार किया है। हालांकि इसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर ही है, लेकिन चीन के पास इसका कोई तोड़ नहीं है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक है। इसकी रफ्तार एक किलोमीटर प्रति सेकेंड है, जबकि चीन के पास फिलहाल मौजूद मिसाइलों की रफ्तार 290 मीटर प्रति सेकेंड है।

यानी भारत की ब्रह्मोस चीनी मिसाइल से तीन गुना तेज है। यह मिसाइल फायर करने में वक्त भी कम लेती है। इसका निशाना भी अचूक है।

ब्रह्मोस की तैनाती की खबरों से चीन बेचैन

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