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देश के लिए रियो ओलिंपिक में एक और मेडल पक्का कर चुकीं बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधू की कामयाबी के पीछे उनके कोच पुलेला गोपीचंद का बड़ा हाथ है। सिंधू 12 साल से गोपीचंद की कोचिंग में खेल रही हैं। शुरू में वे बहुत डिफेंसिव थीं। कोच के कहने के बाद भी वे अग्रेशन नहीं दिखाती थीं। तब गोपीचंद उन्हें घंटों चिल्लाने के लिए कहते थे। इसी तरह कोच ने उनकी फेवरेट चॉकलेट और हैदराबादी बिरयानी खाने पर भी पाबंदी लगा रखी है। बाहर का पानी भी नहीं पीने देते गोपीचंद

– हैदराबाद में गोपीचंद की बैडमिंटन एकेडमी में पीवी सिंधू और श्रीकांत जैसे प्लेयर्स लंबे समय से ट्रेनिंग ले रहे हैं। गोपीचंद सबसे ज्यादा ध्यान शटलर्स की फिटनेस पर देते हैं। प्लेयर्स को बाहर से पानी पीने तक की इजाजत नहीं होती है। उन्होंने अपने एकेडेमी में ब्रेड और शुगर को पूरी तरह से बैन कर रखा है। रियो जाने वाले प्लेयर्स के साथ प्रैक्टिस कर सकें, इसलिए गोपीचंद भी 8 महीने से कार्बोहाइड्रेट बढ़ाने वाले प्रोडक्ट्स से दूर हैं।

गोपीचंद ने कहाचिल्लाओ, नहीं तो रैकेट नहीं छूने दूंगा

– इस ओलिंपिक में सिंधू हर प्वाइंट जीतने पर जोर से चिल्ला रही हैं। पहले ऐसा नहीं था। वे शांत रहकर खेलती थीं। कोच पुलेला गोपीचंद ने उनका अग्रेशन बढ़ाने के लिए चिल्लाने की यह अादत डलवाई। गोपीचंद ने एक दिन प्रैक्टिस के दौरान कोर्ट के बीच में खड़ा दिया। चारों ओर 50 से ज्यादा खिलाड़ी और कोच खड़े थे। गोपी ने कहा कि अब जोर से चिल्लाओ। सिंधू तैयार नहीं थीं।

– तब कोच ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया तो मैं तुम्हें कभी रैकेट नहीं छूने दूंगा। सिंधू रो पड़ीं। लेकिन फिर वो खुलकर चिल्लाईं। इसके बाद से वे घंटों एकेडमी में खुलकर चिल्लाती थीं। इससे उनके खेल में अग्रेशन आया।

पिता ने ली 8 महीने की छुट्टी

– 5 जुलाई 1995 को जन्मीं पुसरला वेंकटा सिंधू के माता-पिता वॉलीबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। पिता पीवी रमन्ना को वॉलीबॉल के लिए अर्जुन अवॉर्ड मिला था।
– रियो ओलिंपिक में सिंधू की तैयारियों पर ध्यान देने के लिए पिता ने आठ महीने के लिए रेलवे से छुट्टी ली। हर सुबह 4 बजे उठकर हैदराबाद में अपने घर से 30 किमी दूर गाची बावली में सिंधू को ट्रेनिंग के लिए पुलेला गोपीचंद की एकेडमी तक ले जाते थे। वो खिलाड़ी से उसकी तैयारी के बारे में भी पूछा करते थे।
– वे कहते हैं कि रिजल्ट अब आया है, लेकिन पिछले पांच महीने सिंधू के लिए काफी मुश्किल रहे।
– सिंधू पद्मश्री से नवाजी जा चुकी हैं। वे तीन साल से रियो ओलिंपिक को ध्यान में रखकर प्रैक्टिस कर रही थीं।

जीत के बाद गोपीचंद बोलेइमोशन कंट्रोल करने की जरूरत

– सिंधू के मैच जीतने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए गोपीचंद ने कहा, ”उस पर बहुत प्रेशर था। पिछले कुछ दिन अच्छे नहीं रहे। हमने बहुत मेहनत की। मैं कोर्ट में कोई इमोशन नहीं दिखाना चाहता था। सिंधू का कल फिर से मैच है। हमें इमोशन्स कंट्रोल करने की जरूरत है।”
– ”मुझे अपने ओलिंपिक (2006 सिडनी) की याद आ गई। मैं सिंधू और श्रीकांत जैसे प्लेयर्स से हमेशा कहते रहता हूं कि अगर ये ईश्वर की ओर से मिला मौका है तो हमें इसे नहीं खोना है।”

बैडमिंटन के फाइनल में पहुंचीं सिंधू अग्रेशन के लिए घंटों चिल्लाती थीं

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