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बैंकों से कर्ज लेकर वापस न करने वालों में उद्योगपतियों का ही नाम शामिल नहीं है, राजनीतिज्ञों का भी इस सूची में नाम है। इं‌डियन एक्सप्रेस ने क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो लिमिटेड (सिबिल) और बैंकों के ‘विलफुल डिफॉल्टर्स’ की लिस्ट की जांच के बाद दावा किया है कि अलग-अलग दलों के कम से कम पांच राजनीतिज्ञ ऐसे हैं, जो उन कंपनियों में निदेशक हैं, जिन्होंने बैंकों से लगभग 900 करोड़ रुपए का कर्ज ले रखा है।

इं‌डियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बैंको से कर्ज लेकर वापस न करने वालों नेताओं में जेबी डायमंड्स के जयराज सुरानी शीर्ष पर हैं। सुरानी गुजरात में भाजपा के उपाध्यक्ष रह चुके हैं और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल का करीबी माना जाता है।

सिबिल की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरानी पर तीन बैंकों का 466 करोड़ रुपए कर्ज है। 2007 के गुजरात विधानसभा चुनावों में सुरानी ने पटेल की पार्टी गुजरात परिवर्तन पार्टी के लिए प्रचार भी किया था। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हो गए।

बैंक का कर्ज लेकर न लौटाने वाले नेताओं में शिवाजी पांजा दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने कौस्तुव रे के स‌ाथ साझेदारी करके आरपी इन्‍फोसिस्टम्स की स्‍थापना की थी। उन्हें पश्‍चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सहयोगी माना जाता है, हालांकि वे इससे इनकार कर चुकी हैं। पांजा ने पांच बैंकों से 180 करोड़ रुपए कर्ज ले रखा है। पिछले साल फरवरी में पांजा को 18 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

मुजफ्फरनगर के पूर्व सांसद और बहुजन समाज पार्टी के नेता कादिर राणा कर्ज लेकर वापस न करने वाले नेताओं में तीसरे नंबर पर हैं। उन्होंने अपनी दो कंपनियों के लिए लगभग 90 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। राणा के रिश्तेदारों की कंपनियां बैंकों के बकाएदारों की सूची में शामिल हैं।

सूची में पंजाब से कांग्रेस के पूर्व विधायक जसबीर सिंह खांगुरा का नाम भी शामिल है, उन्होंने अपनी फर्म के लिए 70 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। कांग्रेस के पुराने नेता अशोक वाजपेयी का नाम भी बकाएदारों की सूची में है, वे बाद में 2007 बसपा में शामिल हुए थे और बाद में जदयू से जुड़ गए।

बैंकों का कर्ज न लौटाने वालों में नेता भी, 5 बड़े डिफाल्टर

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