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कन्या शिक्षा को लेकर गुजरात सरकार खास योजना चलाने का भले ही लाख दावे करे, लेकिन उनके दावों की पोल खुलती दिख रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात, बालिका शिक्षा को लेकर दूसरे अहम राज्यों से काफी पीछे है। इस रिपोर्ट से साफ हो जाता है कि राज्य में लड़कियों की शिक्षा की स्थिति बेहद खराब है।

राज्य सरकार की ओर से ‘कन्या केलावनी’ और स्कूलों में लड़कियों के दाखिले को लेकर कई अहम योजनाएं चलाने का दावा किया जा रहा है, बावजूद इसके राज्य की स्थिति में सुधार आता नहीं दिख रहा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम-बेसलाइन सर्वे 2014 में खुलासा हुआ है कि बालिका शिक्षा के मामले में देश के 21 बड़े राज्यों में गुजरात का नंबर 20वां है। यानी गुजरात राज्य इस क्षेत्र में नीचे से दूसरे नंबर पर काबिज है। यहां 73.4 फीसदी लड़कियां ही स्कूल जाती हैं। गुजरात की स्थिति केवल राजस्थान से ही बेहतर है, जहां 72.1 फीसदी लड़कियां ही विद्यालयों में शिक्षा हासिल कर रही हैं।

सर्वे पर गौर करें तो गुजरात में 15 से 17 साल की उम्र में लगभग 26.6 फीसदी लड़कियां या तो स्कूल छोड़ देती हैं या फिर वह स्कूल गई ही नहीं। इसका मतलब साफ है कि राज्य की 26.6 फीसदी लड़कियां कभी 9वीं या 10वीं में एडमिशन नहीं लिया है।

इस रिपोर्ट से साफ है कि पूरे भारत में लड़कियों के स्कूल जाने का आंकड़ा 83.8 फीसदी है, ये गुजरात के आंकड़े से 10 फीसदी ज्यादा है। अधिकारियों के मुताबिक, जिस समय ये आंकड़े सामने आए राज्य में लड़कियों के स्कूल में एडमिशन का आंकड़ा बढ़ाने के लिए खास योजना चलाई जा रही जा रही थी। इस योजना ने करीब एक दशक पूरा भी कर लिया है। इसमें ‘कन्या केलावनी’ कार्यक्रम और ‘शाला प्रवेशोत्सव’ अहम है, जिनके जरिए मंत्री और सरकारी अधिकारी प्रति वर्ष ग्रामीण इलाकों से बच्चों की स्कूल जाने की कवायद में जुटे हुए हैं। इतनी कोशिशों के बाद भी गुजरात इस क्षेत्र में कई दूसरे पिछड़े राज्यों से भी काफी पीछे है।

बिहार की बात करें तो यहां 15 से 17 साल की उम्र की 83.3 फीसदी लड़कियां स्कूलों में शिक्षा हासिल कर रही हैं। वहीं असम की बात करें तो यहां ये आंकड़ा 84.8 फीसदी है। झारखंड में 84.1 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 90.1 फीसदी, मध्य प्रदेश में 79.2 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 79.4 फीसदी और ओडिशा 75.3 फीसदी। लगभग सभी अहम राज्यों में बालिका शिक्षा का आंकड़ा गुजरात से बेहतर है।

वास्तव में, गुजरात का आंकड़ा 10 से 14 साल की उम्र वर्ग की लड़कियों में भी नीचे से पांचवें नंबर है। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में 73.5 फीसदी लड़कियां साक्षर हैं। लेकिन इनमें से 59 फीसदी लड़कियां 10वीं तक नहीं पहुंच पाती हैं। दूसरी ओर केवल 14.8 फीसदी लड़कियां 12वीं की पढ़ाई पूरी कर पाती हैं।

आंकड़ों के मुताबिक राज्य में महज 14.8 फीसदी लड़कियां ही 10वीं या उससे ऊपर की पढ़ाई पूरी कर रही हैं, वहीं ग्रेजुएशन की बात करें तो यहां आंकड़ा महज 7.8 फीसदी ही है।

इस मामले पर गुजरात के शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चुडास्मा ने बताया कि हम लड़कियों की शिक्षा के गिरते ग्राफ से अवगत हैं इसीलिए हमने उनके 9वीं कक्षा में एडमिशन को लेकर खास योजनाएं चला रहे हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि हम लड़कियों के 8वीं के बाद स्कूल छोड़ने के अनुपात को कम करने की कोशिश करेंगे।

 

 

 

बालिका शिक्षा में नीचे से दूसरे नंबर पर है गुजरात

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