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राम नाईक ने कहा है कि‍ बाबा साहब ने देश को बहुत कुछ दिया है। वे प्रकांड विद्वान, समाज सुधारक, संविधान विशेषज्ञ और मानवतावादी अर्थशास्त्री थे। उन्होंने कहा कि हमें अपना मूल्यांकन करना चाहिए कि क्या हम बाबा साहब के विचारों के अनुरूप समाज के लिए कुछ कर रहे हैं। उनके विचारों को सीमित न रखें उसे समाज के बीच लाने की जरूरत है।
उन्‍होंने कहा कि‍ वास्तव में बाबा साहब देश के संविधान के शिल्पकार हैं। संविधान सभा में राज्यपालों के दायित्व पर जो चर्चा की है उसको पढ़कर लगता है कि उन्‍होंने जो चित्र बनाया था वह आज भी सही दिखता है। बुधवार को राज्‍यपाल ने यह बातें 125वीं अंबेडकर जयंती पर अंबेडकर यूनि‍वर्सि‍टी में कही।

उन्‍होंने कहा कि‍ अंबेडकर का अद्भुत व्यक्तित्व दूसरों को प्रेरणा देने वाला है। उनमें समानता के आधार पर सबको साथ लेकर चलने की क्षमता थी। समाज को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने लोगों को शिक्षित करने का आग्रह किया। उन्‍होंने कॉलेज की स्थापना की। कानून की पढ़ाई के लिए सांयकालीन कक्षाओं की शुरुआत की।

वे राष्ट्र को सर्वोपरि मानते थे। छुआछूत के विरोधी थे। अस्पृश्यता के विषय को उन्होंने तर्क के साथ जोड़ा। आजादी के बाद वे केंद्र में मंत्री भी बने। बाबा साहब और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मंत्री परिषद में रहते हुए देश के लिए महत्‍वपूर्ण काम किया। वैचारिक मतभेद के कारण दोनों ने मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया था।
बाबा साहब में अपने विचारों की प्रमाणिकता के साथ अडिग रहने की क्षमता सलाम करने योग्य है। उनकी इस क्षमता को व्यवहार में लाने का संकल्प लेना होगा। उनके विचारों को सीमित न रखें उसे समाज के बीच लाने की जरूरत है। हमें अपने चरित्र और व्यवहार से ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जो बाबा साहब की विचारधारा के अनुरूप हो। गरीब आदमी भी समाज में समाधान के साथ रह सके।

बाबा साहब के वि‍चारों को समाज में लाने की जरूरत है: राम नाईक

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