नई दिल्ली। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से चीन की विस्तारवादी नीति का विरोध करते रहे हैं। व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता के मुताबिक ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की है। ट्रंप ने कहा कि वो वन चाइना पॉलिसी पर चीन की भावना का सम्मान करते हैं।

दक्षिण चीन सागर और वन चाइना पॉलिसी के मुद्दे पर चीन और अमेरिकी प्रशासन आमने-सामने हैं। अमेरिका ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दक्षिण चीन सागर और चीन की विस्तारवादी नीति का वो विरोध करता रहेगा। लेकिन अमेरिका की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए चीन ने कहा कि यूएस में जो अधिकारी बैठे हुए हैं, उन्हें एक बार फिर इतिहास पढ़ने की जरूरत है। चीन के विदेश मंत्री वैंग यी ने कहा कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ये साफ कहा गया था कि चीन के वो इलाके जो जापान के कब्जे में हैं उन्हें चीन को दोबारा वापस दे दिया जाएगा।

अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट रेक्स टिलरसन ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा बनाए गए विवादित द्वीपों पर जाने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। व्हाइट हाउस सामरिक तौर से महत्वपूर्ण द्वीपों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि यूएस के डिफेंस सेक्रेटरी जिम मैटी ने पिछले हफ्ते कहा कि दक्षिण चीन सागर के विवादित मुद्दों को कूटनीतिक तौर पर सुलझाने की जरुरत है।

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर अमेरिकी रक्षा मंत्री के बयान पर वैंग यी ने कहा कि चीन का स्पष्ट मत है कि विवादित मुद्दों को कूटनीतिक ढंग से सुलझाना चाहिए। उन्होंने कहा वैश्विक शांति हो या क्षेत्रीय स्तर पर शांति हो चीन कभी भी टकराव का रास्ता नहीं चुनता है। लेकिन चीन अपने संप्रभु अधिकारों का उचित तरीके से इस्तेमाल करता रहेगा।

बदले ट्रंप के सुर, कहा- चीन का करेंगे समर्थन

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