नई दिल्ली। जेटली ने साल 2016-17 के वर्ष में घोषित ‘सस्ते आवास योजना’ में कुछ और महत्वपूर्ण बदलाव साल 2017-18 के वित्तीय वर्ष के लिए बजट में प्रस्तावित किए। श्री जेटली ने बताया कि 30 और 60 वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र की बजाए अब 30 और 60 वर्ग मीटर कार्पेट क्षेत्र की गणना की जाएगी। इस योजना के तहत कार्य प्रारंभ होने के बाद भवन निर्माण को पूरा करने की अवधि को मौजूदा तीन साल से बढ़ाकर 5 साल करने का भी प्रस्ताव किया गया है।

जिन बिल्डरों के लिए निर्मित मकान व्यवसाय में पूंजी लगी है। ऐसे बिल्डरों के लिए यह नियम पूर्णत प्रमाणपत्र प्राप्त होने वाले वर्ष के समाप्त होने के एक वर्ष बाद ही लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है ताकि उन्हें अपनी इन्वेंटरी के परिनिर्धारण हेतु कुछ समय और मिले।

श्री जेटली ने अचल संपत्ति से लाभ पर विचार करने हेतु धारण अवधि को मौजूदा तीन साल से घटाकर दो साल करने समेत अचल संपत्ति सहित आस्तियों की सभी श्रेणियों के लिए सूचीकरण के लिए आधार वर्ष भी 1.4.1981 से बदलकर 1.4.2001 किए जाने का प्रस्ताव किया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस कदम से पूंजीगत लाभ पर देयता काफी घटेगी जबकि परिसंपत्तियों की गतिशीलता को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार वित्तीय लिखतों के उस समूह का विस्तार करने की योजना बना रही है जिसमें कर की अदायगी किए बिना पूंजीगत लाभों का निवेश किया जा सके।

बिना भूमि अधिग्रहण अधिनियम के भूमि पूलिंग व्यवस्था द्वारा विकसित की जा रही आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 02.06.2014 तक भू-मालिकों को पूंजी लाभ कर से छूट देने का प्रस्ताव किया।

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि सस्ते आवास अब आधारभूत संरचना का हिस्सा होंगे। इससे सस्ते आवास से जुड़ी परियोजनाओं को आधारभूत संरचना से संबद्ध लाभ प्राप्त हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आवासीय बैंक वर्ष 2017-18 में 20 हजार करोड़ रु. के व्यक्तिगत आवासीय ऋणों का पुर्नवि‍त्त करेगा। विमुद्रीकरण से बैंको में नकदी का प्रवाह बढ़ा है, जिसके चलते बैंको ने आवासीय ऋण समेत अन्य ऋणों की ऋण दरें पहले ही कम कर दी हैं। वित्त मंत्री श्री जेटली ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आवासीय ऋण पर ब्याज में रियायत की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।

बजट 2017 : सस्ते आवास और रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
About The Author
-