नई दिलली। वित्‍त मंत्री ने पेश किए अपने बजट में देश में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए भी उठाए जाने वाले कदमों का जिक्र किया। उन्‍होंने जहां झारखंड और गुजरात को एम्‍स की सौगात दी वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं बेहतर करने का वादा किया।

  1. सरकार ने 2017 तक कालाजार और फिलारियासिस, 2018 तक कुष्‍ठ तथा 2020 तक खसरा समाप्‍त करने के लिए कार्य योजना तैयार की है। 2025 तक तपेदिक को भी समाप्‍त करने का लक्ष्‍य रखा गया है।
  2. इसी प्रकार नवजात शिशु मृत्‍यु दर (आईएमआर) जो 2014 में 39 था, उसे घटाकर 2019 तक 28 करने तथा मातृ मृत्‍यु दर (एमएमआर) जो 2011-13 में 167 था, उसे 2018-20 तक 100 करने के लिए भी कार्य योजना बनाई गई है।
  3. 1.5 लाख स्‍वास्‍थ्‍य उप-केन्‍द्रों को स्‍वास्‍थ्‍य और तंदुरूस्‍ती केन्‍द्रों में परिवर्तित किया जाएगा।
  4. द्वितीयक और तृतीयक स्‍तरों की देखभाल मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्‍टरों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने के लिए प्रति वर्ष 5,000 अतिरिक्‍त स्‍नातकोत्‍तर सीटें सृजित करने का निर्णय लिया।
  5. सरकार देश में चिकित्‍सा शिक्षा और प्रैक्टिस के विनियामक ढ़ांचे में संरचनात्‍मक परिवर्तन के लिए आवश्‍यक कदम उठाने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
  6. झारखंड और गुजरात में दो नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान स्‍थापित किये जाएंगे।
  7. बजट में उचित मूल्‍यों पर औषधि की उपलब्‍धता और जनेरिक औषधियों को बढ़ावा देने के लिए औषधि और सौन्‍दर्य प्रसाधन नियमावली में संशोधन करने का प्रस्‍ताव किया गया है।
  8. चिकित्‍सा उपकरणों को विनियमित करने के लिए नई नियमावली तैयार की जाएगी। ये नियम अंतर्राष्‍ट्रीय नियमों के अनुसार होंगे और इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करेंगे। इससे इन उपकरणों की लागत कम हो जाएगी।

बजट 2017: झारखंड और गुजरात में एम्सम

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