नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने राजनैतिक पार्टियों को दूसरा बड़ा झटका दिया है जब पार्टी में चंदे को लेकर कैश की सीमा केवल दो हजार कर दी है। अब ऐसी पार्टियां हासिए पर आ गई हैं जो टिकट देने के नाम पर पार्टी करोड़ों रुपये का चंदे के नाम नकद में ले लेती थी। मगर अब नकदी में केवल दो हजार रुपये तक ही चंदा दे सकेंगे और बाकी रकम जो देनी होगी वह चेक या फिर डिजिटल से देनी होगी। अमर उजाला ने राजनैतिक पार्टियों के नेताओं से बातचीत की। भाजपा देश की बड़ी पार्टी है और राजनीतिक फंड भी उसी के पास है।  नोटबंदी के बाद अपना कालाधन कैश कर लिया है। भाजपा सोच रही है कि दूसरी  पार्टियों नोट बांटकर चुनाव जीतती हैं इसलिए वह तरह-तरह की परेशानी खड़ी कर रही हैं। मगर भाजपा को सोचना होगा कि यूपी में सपा सरकार काम के कारण आई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने काम किए हैं तो ही सरकार आई थी और पांच साल में 15 साल का विकास किया है। भाजपा को यह जानना होगा कि सरकारें काम से बनती,  चंदे से नहीं।-नरेंद्र सिंह भाटी, एमएलसी एवं पूर्व मंत्री सपा

समाजवादी पार्टी को पहले भी कोई परेशानी नहीं थी और आज भी कोई दिक्कत नहीं है। जो बजट पेश कर रहे हैं वह स्वयं देखें और अपने चंदे की जानकारी सार्वजनिक करें कि उनका चंदा कितना चेक से आया है। समाजवादी पार्टी ने ईमानदारी से पहले से ही सिस्टम शुरू कर रखा है इसमें उन्हें कोई परेशान नहीं है। और वह इस तरह के कदम की निंदा करते हैं जो दूसरों को गलत समझ रहे हैं और अपने आप को ईमानदार घोषित करने पर तुले हैं।-सुरेंद्र सिंह नागर, राज्यसभा सांसद व सपा के राष्ट्रीय महासचिव

बजट में चंदे के प्रावधान ने नेताओं का किया मूड ऑफ

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