फिनलैंड में दुनिया का सबसे बड़ा और महंगा कब्रिस्‍तान बन रहा है। यहां इंसानों की जगह रेडियोएक्‍िटव कचरे को दफनाया जाएगा। वह भी कम से कम एक लाख साल के लिए। परमाणु कचरे को सील किए जाने के बाद फिनलैंड इसकी चाबी फेंक भी सकता है। फिनलैंड अपने एक हरे भरे द्वीप पर जमीन के बहुत नीचे परमाणु कचरे को 100,000 सालों के दफन करने की तैयारी कर रहा है।

इसके साथ ही पश्चिमी किनारे पर स्थित ‘टाइनी ऑल्कियुटो’ दुनिया का सबसे महंगा और सबसे अधिक समय तक रहने वाला कब्रिस्तान बन जाएगा। इस परियोजना पर फिनलैंड चार अरब डॉलर खर्च कर रहा है।

इसमें सुरंगों का एक नेटवर्क होगा जिसे फिनलैंड में ओंकालो कहा जा रहा है। ‘ओंकालो’ की सुरंगों में जमीन के 420 मीटर नीचे 5000 टन परमाणु कचरा रखा जाएगा। यह साल 2020 से काम करना शुरू कर देगा।

1950 के दशक में पहला न्यूक्लियर प्लांट बनने के बाद से ही दुनिया के कई देश इस समस्या से जूझ रहे हैं कि परमाणु रिएक्‍टरों से निकलने वाले कचरे का क्या किया जाए।

अधिकांश देश परमाणु ऊर्जा पैदा करने के बाद बचे न्यूक्लियर कचरे को जमीन के ऊपर अस्थाई तौर से बनाए गए स्टोरेज केंद्रों पर रखते हैं। मगर, ‘ओंकालो’ दुनिया की पहला ऐसी स्टोरेज फैसेलिटी होगी, जो जमीन के अंदर काफी गहराई में बनाई गई है।

फिनलैंड में पहले से ही दो न्‍यूक्‍िलयर प्‍लांट्स हैं। ऐसे में यहां से निकलने वाले परमाणु कचरे को 2120 के दशक तक भरा जाएगा और इसके बाद इसे सील कर दिया जाएगा। इस परियोजना की शुरुआत साल 2004 में की गई थी।

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फिनलैंड में बन रहा है परमाणु कचरे के लिए सबसे महंगा कब्रिस्‍तान

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