लखनऊ। उप्र में पहले चरण का मतदान जारी है। जिन 73 सीटों पर मतदान हो रहा है, वहां 28 फीसदी आबादी मुस्लिम है। ऐसे में शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारूकी, दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम और अलीगढ़ मुस्लिम विवि छात्रसंघ के ये फतवे अहम हो जाते हैं कि मुस्लिम बसपा प्रत्याशियों की वोट दें। इन फतवों से सपा-कांग्रेस के साथ ही भाजपा की भी नींद उड़ गई है।

  • मायावती का ध्यान शुरू से मुस्लिम वोटरों पर था। इसीलिए उन्होंने कौमी एकता दल के विलय को हरी झंडी दी थी।
  • यह सपा के लिए भी तगड़ा झटका था, क्योंकि कौमी एकता दल के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को पार्टी में शामिल कराने के नाम पर ही सपा में कलह शुरू हुई थी।
  • पांच माह तक सपा में यह मसला झूलता रहा लेकिन, ऐन वक्त पर मायावती ने पूर्व में घोषित अपने तीन उम्मीदवारों के टिकट काटकर अंसारी परिवार के उम्मीदवार घोषित कर दिए थे।
  • अंसारी बंधु बाहुबल और दबंगई की सियासत के पर्याय हैं। अंसारी के साथ ही उलेमा कौंसिल भी बसपा के साथ हो गई।
  • कौंसिल का गठन 2009 के बटाला हाऊस एनकाउंटर के बाद आजमगढ़ के युवाओं की कथित प्रताड़ना के खिलाफ हुआ था।

फतवों से सपा-कांग्रेस के साथ ही भाजपा की भी नींद उड़ गई

| अलीगढ़, लखनऊ | 0 Comments
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