RAE BARELI, INDIA  APRIL 22: Priyanka Gandhi Vadra campaigned for her mother Sonia Gandhi in Rae Bareli on Tuesday, April 22, 2014.(Photo by Pankaj Nangia/India Today Group/Getty Images)

हाल ही में आए एक आरटीआई के जवाब में इस बात का खुलासा हुआ है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी ने दिल्ली में स्थित अपने सरकारी आवास के लिए 14 साल पहले वाजपेयी सरकार को महज 8,888 रुपए ही बतौर किराया देने के लिए राजी कर लिया था। जबकि उस वक्त इस बंगले का किराया बाजार भाव के मुताबिक 53,421 रुपए निर्धारित किया गया था। प्रियंका का यह बंगला दिल्ली के लुटियंस इलाके में मौजूद था जो करीब 2,765 वर्ग मीटर में फैला हुआ था।

वीवीआई सुरक्षा के मद्देनजर प्रियंका गांधी को यह सरकारी बंगाल दिया गया था लेकिन उन्होंने बंगले का किराया ज्यादा होने का हवाला देते हुए तात्कालिक प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को 7 मई 2002 में एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने बंगले के निर्धारित किराए 53,421 रुपए को उनके हैसियत  से ‘बहुत ज्यादा’ बताया था। प्रियंका गांधी ने सरकार के सामने यह तर्क रखा था कि उन्हें यह बंगला एसपीजी सुरक्षा के तहत मुहैया कराया गया है और इसके ज्यादातर हिस्से का इस्तेमाल सुरक्षा में तैनात जवान ही करते हैं और उनका परिवार इसका इस्तेमाल नहीं करता।

शहरी विकास मंत्रालय के सम्पदा निदेशालय की ओर से जारी किए गए इस नोटिंग में बताया गया है कि प्रियंका ने सरकार के सामने यह भी दलील दी थी कि वह इस बंगले में स्वेच्छा से नहीं बल्कि सुरक्षा कारणों की वजह से रह रही हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह बंगले के बढ़े किराए 52,421 प्रति माह की बजाय पुराने दर 28,451 रुपए प्रति माह ही दे पाएंगी। आवासीय केंद्रीय कमिटी ने 8 जुलाई 2003 को नए आवासीय समीक्षाओं की एक नई रिपोर्ट जारी की थी। नोएडा के एक आरटीआई कार्यकर्ता देव आशीष भट्टाचार्या को उनके आरटीआई के जवाब में यह समीक्षा रिपोर्ट भेजी गई जिसमें इस बात का खुलासा हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक जब इस बात की समीक्षा की गई तो यह बातें सामने आई कि जिन लोगों को ये बंगले उपलब्ध कराए गए हैं उन्होंने इस पर अवैध कब्जा नहीं किया हुआ था बल्कि उन्हें सुरक्षा के दृष्टिकोण से सरकार की ओर से ये आवास मुहैया कराए गए थे। इसके बाद इस बात पर सहमति बनी की जिन लोगों को एसपीजी या अन्य तरह की सुरक्षा मुहैया कराई गई हैं उन्हें नए लाइसेंस फीस के तहत किराया वसूला जाए क्योंकि इनमें से कुछ लोग निजी व्यक्ति थे और वे बाजार भा के अनुसार किराया देने में सक्षम नहीं थे। इन लोगों में प्रियंका गांधी के अलावा पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल, ऑल इंडिया एंटी-टेररिस्ट फ्रंट प्रमुख एमएस बिट्टा और पंजाब केसरी के संपादक अश्वनी कुमार के नाम शामिल थे। हालांकि, कुमार ने 2012 में अपना आवास खाली कर दिया था।

24 जुलाई 2003 को जारी हुए नए स्पेशल लाइसेंस फीस के अनुसार यह तय हुआ कि प्रियंका गांधी को उनके बंगले के किराए के तौर पर 8,888 रुपए प्रति माह देने होंगे। इसके अलावा गिल को 60,741 रुपए की जगह 10,715 रुपए, बिट्टा को 55,536 रुपए की बजाय 10,203 रुपए और अश्वनी कुमार को 50,311 रुपए की बजाय 8,555 रुपए देना तय किया गया। प्रियंका गांधी को एसपीजी, कैबिनेट सचिव और गृह मंत्रालय के सिफारिश के बाद 1997 में जारी किया गया था। फिलहाल प्रियंका 35, लोधी इस्टेट में स्थित सरकारी आवास में रह रही हैं और वर्तमान में 31,300 रुपए बतौर किराया भी दे रही हैं।

संपत्ति निदेशालय के मुताबिक प्रियंका को 21 फरवरी 1997 में यह आवास आवंटिक किया गया था और उस वक्त इसका किराया 19,900 रुपए था। उसके बाद समय-समय पर इसके किराए में बढ़ोतरी की गई थी। यह बंगला दिल्ली में स्थित है जो क्षेत्रफल के दृष्टिकोण के काफी बड़ा है।

प्रियंका गांधी ने कहा था, नहीं दे सकती 53 हजार किराया, दिए महज 8888 रुपए

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