प्रख्यात मराठी लेखक आरसी ढेरे का शुक्रवार सुबह पुणे में निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। ढेरे को महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा और लोक साहित्य पर शोध के लिए जाना जाता है। वे पिछले कई महीने से बीमार चल रहे थे।

ढेरे को मराठी साहित्य में उनके योगदान और उनकी किताब “श्री विट्ठल” के लिए 1987 में साहित्य अकादमी अवार्ड से सम्मानित किया गया था। महाराष्ट्र पर संतों के प्रभाव को दर्शाते हुए यहां की लोक परंपराओं और साहित्य पर अपने वृहद शोध से उन्होंने साहित्य जगत में अपनी विशेष जगह बनाई थी। उनकी “मुस्लिम-मराठी संतों की कविताएं”, “दक्षिणेचा लोकदेव खंडोबा”, “नाथ सम्प्रदाय का इतिहास” और “श्री वेंकटेश्वर” किताबों को भी खूब प्रसिद्धि मिली।

ढेरे के निधन पर साहित्य जगत ने दुख व्यक्त किया है। ऑल इंडिया मराठी साहित्य सम्मेलन के प्रमुख श्रीपाल सबनीस ने कहा कि ढेरे ने साहित्यिक आलोचना और शोध में नए मानक स्थापित किए। उनका काम मराठी लेखकों की आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।

प्रख्यात मराठी लेखक व साहित्यकार आरसी ढेरे का निधन

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