sri-sri-event-yamuna_17_08_2016

नई दिल्ली। यमुना नदी पर श्रीश्री रविशंकर के ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ द्वारा आयोजित विश्व सांस्कृतिक महोत्सव को लेकर एक बार फिर से विवाद होने की आशंका है। दरअसल, एक विशेषज्ञ समिति ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल (एनजीटी) को बताया कि कार्यक्रम के कारण नदी का बाढ़ वाला क्षेत्र ‘पूरी तरह से बर्बाद’ हो गया है।

एनजीटी द्वारा स्थापित विशेषज्ञ समिति ने इसके प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ को इसके बारे में 47 पन्‍नों की एक रिपोर्ट दी है। इसमें समिति ने कहा कि मुख्य कार्यक्रम स्थल के लिए प्रयुक्त बाढ़ वाले पूरे क्षेत्र में कार्यक्रम से सिर्फ नुकसान नहीं पहुंचा, बल्कि यह पूरी तरह से बर्बाद हो गया।

समिति ने 47 पेज की अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस तीनदिवसीय कार्यक्रम के कारण बाढ़ वाले क्षेत्र ने लगभग सभी प्राकृतिक वनस्पति खो दी है। जमीन अब पूरी तरह से समतल और मजबूत है तथा यह पूरी तरह से जलाशय या गड्ढा रहित हो गई है।

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समिति ने बताया कि जिस जगह बड़ा मंच लगाया गया वह बहुत ठोस है और आशंका है कि जमीन को समतल व ठोस करने के लिए अलग तरह की बाहरी सामग्री का प्रयोग किया गया। डीएनडी फ्लाईओवर से आने रास्तों तथा बारापूला नाले से लेकर दो पुल बनाने के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा लाया गया था।

 

अधिकरण ने जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शशि शेखर के नेतृत्व में सातसदस्यीय विशेषज्ञ समिति को इस साल मार्च में हुए विश्व संस्कृति महोत्सव के स्थल का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था। नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल ने सात विशेषज्ञों को काम दिया था कि वे यह पता करें कि मार्च में हुए कार्यक्रम का यमुना नदी के तट पर क्‍या असर पड़ा है।

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आर्ट ऑफ लिविंग को इस शर्त पर कार्यक्रम करने की इजाजत दी गई थी कि इवेंट के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए वे पांच करोड़ रुपए देंगे।

पूरी तरह श्रीश्री रविशंकर के कार्यक्रम से बर्बाद हो गया यमुना का तट

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