atm-fraud-warning_22_10_2016

नई दिल्ली। भारत सरकार की सर्वोच्च निगरानी एजेंसी कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम-इंडिया (CERT-In) देश पर होने वाले साइबर हमलों पर नजर रखती है। इस एजेंसी ने बैंकों को जुलाई और अगस्त में बैंकों को संभावित साइबर हमलों के बारे में जानकारी दी थी।

यह एजेंसी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को वक्त-वक्त पर संभावित साइबर खतरों के बारे में सूचित करती है। एक शीर्ष सरकारी अफसर ने बताया कि सबसे ताजा अलर्ट सात अक्टूबर को बैंकों को दिया गया था।

इसमें कहा गया था कि भारत की ओर से किए गए सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने के लिए पाकिस्तान की तरफ से बैंकों के नेटवर्क पर ‘साइबर हमला’ हो सकता है। इस अडवाइजरी के जारी होने से एक महीने पहले सितंबर की शुरुआत में ही बैकों को साइबर सुरक्षा में सेंध से जुड़ी शिकायतें मिलने लगी थीं।

कुछ रिपोर्ट्स के आधार पर बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी हैकर्स ने ऐसे सात हजार हमले किए हैं। मालवेयर इन्फेक्शन की वजह से बैकों की साइबर सुरक्षा में सेंध लगी और इसके कारण करीब 32 लाख डेबिट कार्ड की सुरक्षा खतरे में पड़ने गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, पूरी दुनिया में करीब 1.3 करोड़ रुपए की अवैध धन निकासी हुई है।

सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों और पेमेंट गेटवे कंपनियों को इस मामले की जांच करने का आदेश दिया है। हालांकि, माना जा रहा है कि अगर जारी अलर्ट को लेकर त्वरित और ठोस कार्रवाई होती तो इस साइबर हमले को काफी हद तक बेअसर किया जा सकता था।

CERT-In ने 1 जुलाई को बैंकों को चेतावनी देते हुए कहा था कि उन पर साइबर हमला हो सकता है। इसके बाद 12 अगस्त और 24 अगस्त को CERT-In ने चेतावनी दी कि कुछ खास मैलवेयर्स के जरिए कस्टमर्स का डेटा चुराया जा सकता है।

अक्टूबर को CERT-In ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को चेतावनी दी गई कि पाकिस्तान की ओर से साइबर हमले हो सकते हैं। 19 अक्टूबर को CERT-In और NCIIPC ने चेतावनी दी कि एटीएम नेटवर्क में मालवेयर्स के जरिए फ्रॉड बढ़ सकता है।

 

 

 

पाक ने चुराया डेबिट कार्ड का डाटा

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