नई दिल्ली। चीन अपने ‘सदाबहार दोस्त’ पाकिस्तान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार था।

यहां तक कि वह इसके लिए अमेरिका के साथ अपने परमाणु सहयोग को भी दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटने वाला था। यह जानकारी अमेरिकी की खुफिया एजेंसी सीआईए के हालिया सार्वजनिक दस्तावेज से मिली है।

फाइल्स में कहा गया है कि पाकिस्तान के नेताओं के साथ एक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद चीन ने पाक से कहा था कि वह अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी के लिए परमाणु प्रतिष्ठानों की जानकारी साझा नहीं करे। इस समझौते में नॉन-मिलेट्री न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, रेडियो-आइसोटोप्स, मेडिकल रिसर्च और सिविलियन पावर टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर फोकस किया गया था।

अमेरिका का कहना है कि इस अग्रीमेंट के जरिए पाकिस्तान के असंवेदनशील इलाकों में चीन एक न्यूक्लिर एक्सपोर्ट मार्केट को विकसित करना चाहता था। उससे इस कदम से पाकिस्तान के परमाणु ढांचे को लेकर अमेरिका जैसे देशों की चिंता बढ़नी स्वाभाविक थी।

अमेरिका के मुताबिक, इस बात की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है कि चीन को लगा होगा कि अंतरराष्ट्रीट परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी की आड़ में गुपचुप ढंग से पाकिस्तान को मदद पहुंचाना आसान रहेगा।

पाकिस्तान को परमाणु शक्ति बनने में जुटा था चीन: सीआईए

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