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बीते पांच साल में रेलवे ने आरक्षण शुल्क में 100 फीसदी तक की वृद्धि की है, जबकि यात्री किराया 37 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। इसी तरह सुपरफास्ट सरचार्ज पर 88 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। यह खुलासा रेल संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट से हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से 2015 के बीच यात्री किराये में 27 से 37 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी की गई है। इसी तरह सुपर फास्ट सरचार्ज 50 से 88 प्रतिशत तक बढ़ा है। टिकट निरस्त करने का भार यात्रियों पर 50-100 प्रतिशत तक पड़ा है।

तत्काल चार्ज की बात करें तो रिपोर्ट बताती है कि इसमें 33 से 67.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लिपिकीय प्रभार 1 अप्रैल 2013 में 50 प्रतिशत बढ़ा तो 12 नवंबर 2015 को 100 प्रतिशत बढ़ा दिया गया। मेला सरचार्ज भी 33-67 प्रतिशत बढ़ाया गया है। सब अर्बन ट्रेनों के किराये में भी तीन गुणा वृद्धि हुई है।

समिति ने कहा है कि रेलवे कह रहा है कि हम यात्रियों में केवल एक प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगा रहे हैं, जबकि यात्री आय में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्शायी जा रही है।

समिति ने पाया है कि पिछले पांच साल में टिकट रद्द कराने, आरक्षण, तत्काल, सुपर फास्ट, एमयूटीपी सरचार्ज, मेला सरचार्ज व माला भाड़ा दरों के कई प्रभारों में 27-100 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। इनके बारे में बजट भाषण में उल्लेख नहीं किया गया है।

समिति ने तेजस व हमसफर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इस तरह की ट्रेन चलाकर यह कहना सही नहीं होगा कि बजट में किराये में कोई वृद्धि नहीं की गई है।

यह भी सवाल उठाया है कि प्रीमियम व सुविधा ट्रेन अभी भी चल रही हैं। तेजस ट्रेन मूलत: परिवर्तनीय मूल्य निर्धारिण पर आधारित प्रीमियम सेवा होगी, इस पर भी समिति ने सवाल उठाया है।

पांच साल में दोगुना हुआ रेलवे आरक्षण शुल्क

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