सरकारी सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित करने की डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना को रेलवे में भी जल्द ही लागू करने की तैयारी है। इसे लागू करने की जल्दबाजी इसलिए है, क्योंकि इस समय रेलवे की वित्तीय हालत खराब है और इसका ऑपरेटिंग रेशियो 110 से भी ऊपर चला गया है। नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबराय की अध्यक्षता वाली एक कमेटी ने पिछले साल ही ऐसा करने की सलाह दी है।

सरकार से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे समाज के विभिन्न वर्गों को रेल यात्रा में छूट के जरिये सब्सिडी देता है, जो कि किराये के दस फीसदी से लेकर शत-प्रतिशत तक होता है। सरकार की योजना है कि किराये में छूट लेने वाला व्यक्ति पहले पूरा पैसा देकर टिकट कटाये और बाद में आधार कार्ड के डाटाबेस का उपयोग करते हुए लाभार्थी के बैंक खाते में सब्सिडी की रकम हस्तांतरित कर दी जाए। यह व्यवस्था वैसे ही काम करेगी जैसे कि घरेलू रसोई गैस के कनेक्शन में डीबीटी के जरिये सब्सिडी दी जा रही है।

प्रधानमंत्री कार्यालय से रखी जा रही नजर
वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बारे में रेल मंत्रालय को पिछले साल ही पत्र भेजा जा चुका है और अभी तक कुछ बैठकें हो चुकी हैं। इस पूरी योजना का सूत्रधार प्रधानमंत्री कार्यालय है और वहीं से इस पर नजर रखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि सब ठीक रहा तो अगले वित्त वर्ष में इस योजना को अमली जामा पहना दिया जाएगा।

एलपीजी सब्सिडी की तरह ही मिलेगी सब्सिडी
यात्रियों को कैसे मिलेगी सब्सिडी, इस सवाल पर अधिकारी ने बताया कि टिकट बुकिंग के समय यात्रियों को पूरा किराया देना होगा। उसी समय काउंटर पर आधार नंबर भी देना होगा, जिससे रेलवे के पास यात्री का खाता नंबर, नाम, पता सब कुछ पहुंच जाएगा। यात्रा पूरी होने के बाद टिकट पर जितनी सब्सिडी की रकम बनेगी, उसे खाते में भेज दिया जाएगा। यह उसी तरह है, जैसे रसोई गैस सिलेंडर लेते वक्त डिलीवरीमैन को पूरा पैसा देना होता है और सब्सिडी की रकम खाते में भेज दी जाती है।

रेलवे की वित्तीय हालत इस समय है खराब
रेल टिकटों में डीबीटी लागू करने की बात उस समय उठी है, जब रेलवे की वित्तीय हालत खराब हो चली है। पिछले महीने की बात करें तो उस समय रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो 110 से ऊपर चला गया था। मतलब कि रेलवे को 100 रुपये कमाने के लिए 110 रुपये से भी ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ती है।

उल्लेखनीय है कि रेल बजट को आम बजट में समाहित करने का सुझाव नीति आयोग ने ही दिया था। इस सुझाव पर अमल करते हुए वर्ष 2017-18 के आम बजट में रेलवे के बजट को भी मिला दिया गया है। नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबराय रेलवे की बड़ी परियोजना के लिए निधि जुटाने के लिए बनी उच्च स्तरीय कमेटी के अध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा वह रेलवे बोर्ड के कुछ अहम कार्यों पर भी सुझाव दे रहे हैं।

डीबीटी लागू होने से लोगों को होंगी असुविधाएं भी

रेल यात्रा में डीबीटी लागू होने से भले ही रेलवे को फायदा हो, लेकिन इससे वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों, विभिन्न प्रकार की असाध्य बीमारियों से ग्रसित लोगों या अन्य श्रेणी में छूट पाने वाले यात्रियों को परेशानी भी होगी। अभी ऐसे व्यक्ति किराये में छूट लेने के लिए टिकट खिड़की पर प्रमाण-पत्र पेश करते हैं और उन्हें हाथों-हाथ छूट मिलती है। डीबीटी लागू होने पर पहले उन्हें पूरे किराये का भुगतान करना होगा और यात्रा पूरी होने के बाद उनके खाते में सब्सिडी का हस्तांतरण होगा।

पहले पूरा पैसा देकर लेना होगा रेल टिकट, बाद में खाते में आएगी सब्सिडी

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