मुंबई। गुरुवार को नौसेना में स्कॉर्पीन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी आईएनएस खांदेरी को शामिल कर लिया गया। यह पनडुब्‍बी एंटी मिसाइल से लेकर परमाणु झमता से लैस है। जलावतरण में पनडुब्बी उस पंटून से अलग होती है जिस पर इसे तैयार किया जा रहा है। इसके बाद इसकी अंतिम सेटिंग तैरने लगेगी।

भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो परंपरागत पनडुब्बियों का निर्माण करते हैं। भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 75 के तहत एमडीएल में फ्रांस के मैसर्स डीसीएनएस के साथ मिलकर छह पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है।

कलवरी और खंडेरी पनडुब्बियां आधुनिक फीचर्स से लैस है। यह दुश्मन की नजरों से बचकर सटीक निशाना लगा सकती हैं। इसके साथ ही टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइलों से हमले भी कर सकती हैं।

भारतीय नौसेना की पनडुब्बी शाखा इस साल आठ दिसंबर को 50 साल पूरे करेगी। आठ दिसंबर 1967 को नौसेना में पहली पनडुब्बी आइएनएस कलवरी शामिल होने के उपलक्ष्य में हर साल इस दिन को पनडुब्बी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। सात फरवरी 1992 को पहली स्वदेश निर्मित पनडुब्बी आइएनएस शाल्की के शामिल होने के साथ ही भारत पनडुब्बी बनाने वाले देशों के समूह में शामिल हो गया था। इसके बाद आइएनएस शांकुल को 28 मई 1994 को लॉन्‍च किया गया।

इस सबमरीन के जरिए नेवल टास्‍क फोर्स भी दुश्‍मनों पर कभी भी कहीं से भी हमला करने में सक्षम होगी। इस पनडुब्‍बी को माड्यूलर कंस्‍ट्रेक्‍शन को ध्‍यान में रख कर बनाया गया है। इसके तहत सबमरीन को कई सेक्‍शन में डिवाइड किया जा सकता है।

पनडुब्बी आईएनएस खांदेरी को गुरुवार को नौसेना में शामिल कर लिया गया

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