सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि पति की दौलत पर पत्नी के भाई का कानूनी तौर पर कोई हक नहीं बनता। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला के भाई को परिवार का हिस्सा भी नहीं कहा जा सकता। यह फैसला जस्टिस दीपक मिश्रा और आर भानुमति की एक बेंच ने दिया। उनके पास दुर्गा प्रसाद का एक केस आया था। दुर्गा प्रसाद नाम के शख्स ने खुद को अपनी बहन के परिवार का हिस्सा बताते हुए देहरादून में एक प्रोपर्टी के किरायदारी का अधिकार अपने पास रखने की बात कही थी। उसपर कोर्ट ने फैसले देते हुए कहा कि या तो दुर्गा प्रसाद चार हफ्ते के अंदर प्रोपर्टी को खाली कर दें वर्ना कोर्ट के एक्शन के लिए तैयार रहें।

1940 में हेम राम शर्मा नाम के एक शख्स ने देहरादून में प्रोपर्टी किराए पर ली थी। हेम राम शर्मा की मौत के बाद उनके बेटे बलदेव वहां रहने लगे। फिर बलदेव की मौत के बाद उनकी पत्नी ललिता किराएदार बन गई। ललिता की 2013 में मौत हो गई। उनकी कोई संतान नहीं थी। इसके अलावा उन्होंने कोई वसीयत भी नहीं छोड़ी। ललिता की मौत के बाद उनके भाई दुर्गा प्रसाद ने किराएदारी का अधिकारी का दावा पेश किया। उन्होंने कहा कि वह ललिता के परिवार का हिस्सा हैं और वह अपनी बहन के साथ मिलकर मेडिकल का बिजनेस भी कर रहे थे।

इसपर कोर्ट ने UP Urban Buildings (Regulation of Letting, Rent and Eviction) Act, 1972 को भी ध्यान में रखा। लेकिन उसको देखने के बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि ललिता के भाई ना तो परिवार का हिस्सा हैं और ना ही वारिस।

पति की दौलत पर पत्नी के भाई का नहीं बनता कोई हक – सुप्रीम कोर्ट

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