वामपंथी नेता गोविंद पंसारे हत्याकांड में बांबे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा है कि अगर उसने मामले की सीबीआई जांच का फैसला किया है तो फिर सरकारी वकील को इस बारे में जानकारी क्यों नहीं है ? पीड़ित परिवार के वकील की ओर से कोर्ट में दावा किया गया था कि महाराष्ट्र सरकार ने सीबीआई जांच का फैसला किया है।

हाई कोर्ट ने मामले की धीमी जांच के लिए सीआइडी को फटकार लगाई। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड की धीमी प्रगति पर भी असंतोष व्यक्त किया। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। मामले की सुनवाई जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस शालिनी फनसालकर की पीठ कर रही है।

पंसारे के परिवार ने मामले की सीबीआई जांच के लिए प्रदेश सरकार से अपील की थी। पीड़ित परिवार के वकील अभय नेवगी ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने सीबीआई से जांच कराने पर सहमति भी व्यक्त की थी। लेकिन लोक अभियोजक संदीप शिंदे ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। कोर्ट ने शिंदे को निर्देश दिया कि वह पता करके बताएं कि मामले की सीबीआइ जांच के निर्देश दिए गए हैं या नहीं। अगर नहीं, तो उसके पीछे क्या कारण है।

वामपंथी नेता पंसारे और दाभोलकर हत्याकांड के सिलसिले में दोनों के परिजन जांच की निगरानी हाई कोर्ट से कराने की मांग कर रहे हैं। अब कोर्ट मामले की सुनवाई छह हफ्ते बाद करेगा। दाभोलकर की हत्या सन 2013 में जबकि पंसारे की हत्या 2015 में हुई थी। दोनों की हत्या के लिए दक्षिणपंथी संगठनों पर शक है।

पंसारे व दाभोलकर हत्याकांड की धीमी प्रगति से हाई कोर्ट असंतुष्ट

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