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सदियों से चला आ रहा कश्मीरी भाईचारा यहां आज भी ज़िंदा है। इसकी मिसाल श्रीनगर में देखने को मिली, जहां एक कश्मीरी पंडित बुजुर्ग की अर्थी को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कंधा दिया।

श्रीनगर के महाराज गंज इलाके में रहने वाले कश्मीरी पंडित धनराज मल्होत्रा का लंबी बीमारी के चलते शनिवार को देहांत हो गया। उनके अंतिम संस्कार के लिए स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सारे इंतज़ाम किए और उनके परिवार की हर तरह से मदद की।

धनराज मल्होत्रा का परिवार उन परिवारों में से एक है, जिसने 90 के दशक में आतंकवाद के चरम दौर में भी कश्मीर से पलायन नहीं किया। वह अपने एक बेटे भारत मल्होत्रा साथ यहां रह रहे थे।

उनके भतीजे धीरज मल्होत्रा के अनुसार उसके पिता तिलक राज मल्होत्रा को 13 मार्च 1993 में अज्ञात बंदूक धारियों ने मौत के घाट उतार दिया था। इसके बावजूद भी हमने घाटी छोड़ने का मन नहीं बनाया।

दीपक अपने चाचा के मकान में ही उनके साथ रहते थे। कश्मीरी पंडित समुदाय ने मुस्लिम समुदाय की इस भाव की सराहना की, वहीं मुस्लिम समुदाय के लोगों के अनुसार वह सब भाई हैं। एक दूसरे की सहायता करना उनका कर्तव्य है। युवक अल्ताफ के अनुसार हमने अपना कर्तव्य निभाया है और भाईचारे की मिसाल कायम रखी है, जिसके बारे में वह सदियों से सुनते आ रहे हैं।

पंडित की अर्थी को मुस्लिम समुदाय ने दिया कंधा

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