Lucknow: Samajvadi Party supremo Mulayam Singh Yadav with Uttar Pradesh Chief Minister Akhilesh Yadav during Samajwadi Party's Three-Day Convention in Lucknow on Wednesday. PTI Photo by Nand Kumar(PTI10_8_2014_000150B)

“सपा में सिर्फ मुलायम और शिवपाल की ही चलती है” राजनीतिक गलियारों के इस जुमले को गलत साबित करते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बिना सपा प्रमुख से पूछे कैबिनेट मंत्री बलराम यादव को बर्खास्त कर दिया। यह स्पष्ट था कि ‌अखिलेश यादव कौमी एकता दल के सपा में विलय से नाखुश थे। इस विलय में मंत्री बलराम यादव की बड़ी भूमिका बताई जा रही है।

मंगलवार को जब यह खबर आई कि कौमी एकता दल का सपा में विलय हो गया है उसी समय अखिलेश यादव कार्यकर्ताओं से कह रहे कि सपा अकेले चुनाव में उतरेगी और पार्टी कार्यकर्ताओं को अभी से इसकी तैयारी करनी चाहिए। निश्चित ही इस विलय की भनक अखिलेश को नहीं रही होगी। यह शिवपाल और मुलायम सिंह यादव के द्वारा मिलकर पकाई गई राजनीतिक खिचड़ी थी। चूंकि पार्टी के ऐसे फैसले मुलायम और शिवपाल मिलकर पहले भी करते रहे थे इसलिए इस बार भी उन्होंने अखिलेश को विश्‍वास में लेने की जरूरत नहीं समझी।

विलय की घोषणा के बाद अखिलेश यादव ने यूपी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री बलराम सिंह यादव को बर्खास्त कर दिया। पार्टी के छोटे-छोटे फैसलों पर पिता की राय लेने वाले अखिलेश यादव ने इस मसले पर उनसे पूछने की जरूरत नहीं समझी। यह फैसला यह बताने के लिए काफी था कि अखिलेश सरकार के अंदर के वह सारे फैसले अकेले ले सकते हैं जिसके लिए वह अधिकृत हैं।

सूत्रों के अनुसार मुलायम सिंह यादव ने भी कौमी एकता दल के विलय के मामले पर एक बार भी अखिलेश यादव से उनकी राय जानना जरुरी नहीं समझा। इस मामले को पूरी तरह से दूर ही रखा गया। मुलायम सिंह को यह अनुमान था कि अगर इस मामले में अखिलेश से रायशुमारी की गई तो विलय का यह मामला अंनतकाल के लिए टल जाएगा। कौशांबी की एक सभा में अतीक अहमद को हाथ से पीछे करने का एक वीडियो यह बताने के लिए काफी था कि अपराधी छवि के लोगों से अखिलेश दूरी बनाकर चलना चाहते हैं।

मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के विलय का मामला मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों के लिए ही नाक का प्रश्‍न बन गया है। अखिलेश यादव तुरंत चाहते हैं कि इस पार्टी के विलय को खारिज किया जाए। बुधवार के दिन उनके जो भी कार्यक्रम थे उन्होंने स्‍थगित कर दिए। वह पहले शिवपाल सिंह यादव से मिलने गए और खबर है कि वह इस मसले पर सपा सुप्रीमों से मिलेंगे।

अखिलेश और मुलायम दोनों ने ही इसे प्रतिष्ठा का प्रश्‍न बनाया हुआ है। अखिलेश चाहते हैं कि विलय को रद्द करके वह कड़ा संदेश दें कि उनकी पार्टी अपराधी छवि वाले लोगों से दूर ही रहना चाहेगी। मुलायम सिंह यादव इस मामले को ठंडा करके आराम से फैसला लेना चाहते हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार मुलायम चाहते हैं कि इस मामले को अभी तूल न दिया जाए। 25 जून को होने वाली संसदीय बोर्ड की बैठक में इस बारे में फैसला किया जाए।

 

पार्टी के आंतरिक सर्वे के अनुसार लोग भले ही सपा सरकार से नाखुश हों लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लेकर लोगों के जेहन में इमेज बुरी नहीं है। अखिलेश यादव अपनी इसी छवि को बनाए रखना चाहते हैं। बिना मुलायम से पूछे बलराम यादव को बर्खास्त कर देने के फैसले को वह इसी इमेज को पुख्ता करने की कड़ी में देखना चाहते हैं।

इस पूरे मसले पर अखिलेश यादव ने न सिर्फ सक्रियता दिखाई बल्कि यह साबित करने का प्रयास भी किया कि भले ही पार्टी के सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव हों लेकिन पार्टी की हर गतिविधि में उनकी पूरी होती है। जिस तरह से अखिलेश इस मामले में सक्रिय हैं उसे देखकर कहा जा सकता है कि बलराम यादव को बर्खास्त करने के अपने फैसले पर अड़े रहेंगे। संभव है कि कौमी एकता पार्टी का विलय भी बुधवार को ही खत्म हो जाए।

न मुलायम ने अखिलेश की सुनी और न ही अखिलेश ने मुलायम की

| उत्तर प्रदेश, लखनऊ | 0 Comments
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