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नोएडा। नौकरी का लालच कहें या रोजी-रोजी का संकट। नोएडा विकास प्राधिकरण में सफाईकर्मी पिछले चार दशक से शहर और गांवों में गटर और नालों के नर्क साफ करते आ रहे हैं लेकिन आज तक उन्हें पक्की नौकरी नहीं मिल सकी है। जिसके कारण सफाईकर्मी कई बार नोएडा प्राधिकरण और शासन-प्रशासन के खिलाफ आंदोलन भी कर चुके हैं। लेकिन हर बार उन्हें केवल अफसरों के आश्वासन हीं मिलते हैं। अपनी मांगों को लेकर सफाईकर्मी एक बार फिर से नोएडा प्राधिकरण पर बीते 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन हडताल कर रहे हैं।

30 जून 1998 को खत्म हो गई थी ठेका प्रथा
17 अप्रैल 1976 को स्थापित नोएडा विकास प्राधिकरण में चपरासी से लेकर क्लर्क तक को स्थाई नौकरी मिलती है, वहीं करीब 40 साल से नोएडा के सैकडों सैक्टरों को साफ-सुथरा करते आ रहे सफाईकर्मियों को स्थाई नहीं किया गया, जबकि सफाईकर्मियों के विभिन्न आंदोलन और श्रमिक संगठनों के विरोध पर नोएडा विकास प्राधिकरण में सफाईकर्मियों से ठेके पर कार्य कराने की प्रथा को 30 जून 1998 में समाप्त कर दिया गया था। उधर राष्टृीय सफाई कर्मचारी आयोग की अध्यक्षा कमला गुजराल ने भी साल 2012 में नोएडा प्राधिकरण में सफाईकर्मियों को ठेके पर रखे जाने पर विरोध जताया था। श्रमिक नेताओं का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण के भ्रष्ठ अफसरों की वजह से सफाईकर्मियों को स्थाई नौकरी पर रखने की बजाय ठेकेदारों के माध्यम से कार्य कराते आ रहे हैं। सैकडों सफाईकर्मी सफाई करते-करते बूढ़े हो गए, लेकिन वह पक्की नौकरी नहीं पा सके।

अफसरों पर 2.5 फीसदी कमीशन लेने का आरोप
राष्टृीय सफाई मजदूर कांग्रेस के गौतमबुद्धनगर अध्यक्ष जयप्रकाश पारचा ने बताया कि नोएडा में सफाईकर्मी आज तक स्थाई नहीं किए गए हैं। सफाईकर्मियों से कार्य तो नोएडा प्राधिकरण के अफसर ले रहे हैं। लेकिन जब बात आती है सफाईकर्मियों की पक्की नौकरी की तो उन्हें ठेकेदारी के तहत कार्य कराना बताया जाता है। जयप्रकाश पारचा ने बताया कि एक तरफ नोएडा प्राधिकरण में सफाईकर्मियों के श्रम कानूनों का उल्ंघन हो रहा है, वहीं प्राधिकरण अफसर ठेकेदार से 2.5 फीसदी कमीशन लेते हैं।

यह हैं सफाईकर्मियों की प्रमुख मांगे-
1. स्थायी किए जाएं सभी पुराने सफाई कर्मचारी
2. हर साल की जाए सफाईकर्मियों की वेतन बढोत्तरी
3. सफाईकर्मी की मौत होने पर मिले 50 हजार रूपये की आर्थिक सहायता
4. डयूटी के दौरान मौत होने पर सफाईकर्मी के परिजनों को मिले 10 लाख रूपये का मुआवजा
5. सफाईकर्मियों के संगठन के लिए नोएडा में बने कार्यालय
6. सफाईकर्मियों को मिले वर्दी, जूते और जीवन रक्षक उपकरण
7..ठेकेदार की बजाय बैंक खाते के जरिए दिया जाए सफाईकर्मियों का वेतन
8. सफाईकर्मियों के लिए कार्य स्थल पर दी जाएं जनसुविधाएं

नौकरी की आस में 40 साल से ढो रहे नर्क

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
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