वित्त मंत्रालय द्वारा लोक लेखा समिति (पीएसी) को बताया गया कि नोटबंदी के बाद 9 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच किसी भी सरकारी एजेंसी ने जाली नोट में एक भी रुपया जब्त नहीं किया है। नोटबंदी के बाद 9 नवंबर से 4 जनवरी तक इनकम टैक्स विभाग द्वारा की गई कई सर्च ऑपरेशन्स में 474.37 करोड़ रुपए के नए और पुराने नोट जब्त किए। लेकिन उनमें जाली नोट शामिल नहीं थे। मंत्रालय को यह भी पता नहीं है कि जो पैसे पकड़े गए वह किसी आतंकी समूह के थे या फिर वह पैसा छोटे-मोटे तस्करों का था।

यह आंकड़े चौंकाने वाले इसलिए है क्योंकि नोटबंदी को लागू करने के वक्त सरकार ने कहा था कि इससे जाली नोटों पकड़े जाएंगे और उनपर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा यह भी कहा गया था कि इससे आतंकवादी गतिविधियों को रोकने में भी मदद मिलेगी। लेकिन वित्त मंत्रालय द्वारा बताई गई ये बातें सबसे उलट साबित हो रही हैं। सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया दोनों ने दावा किया था कि उनके पास जानकारी है कि भारतीय करेंसी के जाली नोटों की मदद से आंतकवाद और ड्रग्स का कारोबार फल-फूल रहा है।

नोटबंदी के दौरान एक भी जाली नोट जब्त नहीं हुआ : मंत्रालय

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