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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच विधानसभा चुनावों के दौरान जमकर तनानती देखने को मिली थी। चुनाव तो खत्म हुए लेकिन दोनों नेताओं के बीच तल्‍खी बरकार है। आलम ये है कि न नीतीश कुमार प्रधानमंत्री पर वार करने का कोई अवसर चूकते हैं न नरेंद्र मोदी बिहार के मुख्यमंत्री पर।

प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर शुरू हुआ विश्व योगा दिवस बिहार में इसी तनातनी की भेंट चढ़ गया। जब प्रधानमंत्री मोदी देशभर में लोगों को योग करने की अपील कर रहे थे तब पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उसे दरकिनार कर विश्व संगीत दिवस मनाने की तैयारी कर रहे थे।

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार नीतीश के इस मोदी विरोध के पीछे देशभर में शराब बैन के उनके आह्वान और मंशा को भाजपा नेतृत्व वाली राजग सरकार द्वारा अटकाना है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू करने के बाद नीतीश कुमार देशभर में भी इस पर अमल चाहते हैं, इसलिए वह कई राज्यों में घूमघूमकर वहां की सरकारों से अपने यहां भी शराब पर बैन करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन भाजपा शासित राज्यों में उनकी इस मुहिम को खास तवज्जो नहीं मिल रही है।

भाजपा नेता भी उनके इस अभियान की मंशा पर सवाल उठा चुके हैं। इसको लेकर ही नीतीश भाजपा और एनडीए से नाराज बताए जाते हैं। अखबार के अनुसार बिहार सरकार अधिकारिक रूप से अंतरराष्‍ट्रीय योगा दिवस मनाने की बजाय विश्व संगीत दिवस मनाने की तैयारी में है।

जेडीयू के प्रवक्ता संजय सिंह के अनुसार केंद्र सरकार योगा के प्रचार के लिए मोटा धन खर्च कर रही है जिससे यह राजनीतिक के अखाड़े में परिवर्तित हो गया है। सही बात तो ये है कि प्रधानमंत्री मोदी इसके बहाने अपनी ब्रांडिंग कर रहे हैं।

वहीं पीटीआई के मुताबिक झारखंड के पलामू में एक बैठक के दौरान सोमवार को नीतीश ने कहा था कि ”योग एक प्राकृतिक उपचार है लेकिन शराब के आदि इसे नहीं कर सकते। इसलिए जब तक शराब पर पूरे देश में प्रतिबंध नहीं लगता तब तक योग औचित्यहीन है।” दूसरी ओर राज्य के अध‌िकारियों के अनुसार म्यूजिक डे के अवसर पर पटना में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, इसके अलावा पटना में कई कलाकार अपनी प्रस्तुतियां भी देंगे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नीतीश ने मोदी के योगा डे को दरकिनार कर मनाया ‘वर्ल्ड म्यूजिक डे’

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