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बीते दिनों बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थित एक कैफे में हुए आतंकी हमले मे शामिल आतंकियों को भड़काने के लिए जिम्मेदार माने जा रहे जाकिर नाईक के खिलाफ उनके घर के सामने कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। जाकिर पर आरोप हैं कि बांग्लादेश हमले में शामिल दो आतंकी उसके भाषण से प्रभावित थे।

बता दें  कि जाकिर ने मुंबई में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन नाम की संस्था बना रखी है। इसके अलावा पीस टीवी पर उसकी तकरीर लगातार आती है जिसके दुनिया भर में करोड़ों दर्शक हैं। बांग्लादेश में हुए आतंकी हमले में शामिल हरकत-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के छह आतंकियों में से दो के जाकिर के समर्थक होने की बात वहां के अधिकारियों ने स्वीकारी है। बांग्लादेश में भी जाकिर के समर्थकों की संख्या काफी है।

जाकिर हरेक मुसलमान को ‘आतंकवादी’ बनने की सलाह देता है। उसका तर्क है कि अमेरिका और इस्लाम के खिलाफ काम करने वाले सबसे बड़े आतंकी हैं। इन आतंकियों में आतंक भरने के लिए हरेक मुसलमान को आतंकवादी बनना चाहिए।

वहीं जाकिर का भाषण अब सरकार के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। सूत्रों की मानें अभी यह नहीं कहा जा सकता कि जाकिर पर क्या कार्रवाई हो सकती है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश की खबर के बाद खुफिया ब्यूरो (आईबी) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जाकिर की गतिविधियों और उसके भाषणों पर नजर रखने लगी हैं। यू-ट्यूब पर मौजूद उसकी तकरीरों की पड़ताल भी की जा रही है।

जाकिर पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए उनके रिश्तेदार मुबारक कपड़ी ने कहा कि उन्होंने कभी आतंक का प्रोपैगैंडा नहीं फैलाया। अगर उनके वाक्यों में से कोई अपने लिए कुछ वाक्य चुन लेता है तो वह एक अलग मामला है। सभी आरोपों को आधारहीन बताते हुए मुबारक ने कहा कि वो जल्द ही भारत आएंगे और अपनी बात स्पष्ट करेंगे। वो मीडिया से भी मुखातिब होंगे।

जिन आतंकियों ने नाईक को अपना नायक माना था उन पर जाकिर ने कहा कि ‘मुझे कोई आश्चर्य नहीं है कि वो मुझे जानते थे। मेरे फेसबुक पर सबसे ज्यादा फॉलोवर्स बांग्लादेश से हैं। 90 प्रतिशत बांग्लादेशी मुझे जानते हैं। इसमें वरिष्ठ नेता, छात्र और आम आदमी शामिल हैं।  क्या मैं इस पर आश्चर्य व्यक्त करूं कि हमलावर मुझे जानते थे? नहीं।’

बता दें कि बांग्लादेश ने भारतीय इस्लामिक उपदेशक जाकिर के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

ढाका में आतंकी हमले में शामिल दो आतंकियों के जाकिर के भाषणों से प्रभावित होने की बात सामने आने के बाद वहां के सूचना और प्रसारण मंत्री हसनुल हक ने कहा कि भारत को नाईक के आतंकवादियों से संबंध की जांच करनी चाहिए।

वहीं, वहां के गृह मंत्री असादुजमन खान ने कहा कि आतंकी हमले की जांच में तीसरे देश से संबंध होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में भारत से हम सहयोग की अपेक्षा करते हैं।

बता दें कि मुंबई में जन्में जाकिर नाईक खुद को डॉक्टर, मुस्लिम धर्मगुरु, लेखक और वक्ता बताता है। फेसबुक पर नाइक के 1 करोड़ 14 लाख फॉलोअर हैं। इसने इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की। इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन भारत में पीस टीवी नाम का धार्मिक चैनल भी चलाती है। 100 से ज्यादा देशों में इसका प्रसारण होता है और दुनिया में इसके दर्शकों की संख्या 100 करोड़ के आसपास बताई जाती है।

जाकिर दावा करते हैं कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों को पढ़ रखा है। नाईक इससे पहले भी विवादों में आ चुके हैं। सबसे पहले नाइक तब विवादों में आए थे जब उन्होंने कहा था कि वो ओसामा बिन लादेन को आतंकवादी नहीं मानते। हालांकि इस पर नाईक का कहना है कि जिस वीडियो में उन्हें ओसामा को आतंकी न मानने की बात दिखाई गई है वो डॉक्टर्ड है।

जाकिर इसके बात तब भी विवादों में आए थे जब 2009 में न्यूयॉर्क के सबवे में फिदायीन हमले की साजिश रखने के आरोप में गिरफ्तार नजीबुल्ला के दोस्तों के अनुसार वह काफी वक्त तक नाईक की तकरीरों को टीवी पर देखता था। जाकिर पर कई मुल्कों में जाने पर रोक लगी है। शरीया कानून लागू करने और बाकी धर्मों की तीखी आलोचना के चलते ब्रिटेन, कनाडा, मलेशिया जैसे कई देशों ने इनके प्रवेश पर पाबंदी लगाई हुई है।

नाईक के घर के बाहर मुस्लिम संगठनों ने किया प्रदर्शन

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