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हंसता-खेलता पंजाब…देश में अन्न का कटोरा…हरित क्रांति का नायक। यही रही है इस सूबे की पहचान। मगर अब तस्वीर सिर्फ खुशहाली की नहीं है। कर्ज से दम तोड़ते किसानों और नशे में जिंदगी बर्बाद करते युवाओं की खबरें रोज इस प्रदेश से आती हैं। यह अलग बात है कि सरकार और उसके नुमाइंदे कहते हैं कि पंजाब में नशे की समस्या नहीं है, यह प्रदेश को बदनाम करने की साजिश है।

दूसरी ओर विपक्ष सरकार पर सच से मुंह फेरने और नशे को बढ़ावा देने के आरोप लगा रहा है। नशे में डूबती पंजाब की युवा पीढ़ी की चिंता यहां की फिल्मों और गीतों में भी साफ झलकती है। दारू दूरू पींदा होवे चल जऊ, चिट्टे तों परहेज चाहिदा जैसे गीत गूंज रहे हैं। फिल्मों और गीतों को आप सेंसर कर सकते हैं मगर सच को सेंसर करना मुश्किल है। सच वही है, जो छुपाए नहीं छुपता। सच तो लोक गीत बनकर गली गली गूंजने लगता है। नशे ने पंजाब की क्या हालत कर दी है, इसी पर केंद्रित है अमर उजाला टीम की अनसेंसर्ड ग्राउंड रिपोर्ट…

फिरोजपुर और फाजिल्का जिले में नशे की लत से कई परिवार बर्बाद हुए हैं। इस साल छह माह में पाकिस्तान से आई 150 किलो हेरोइन पकड़ी जा चुकी है। सरहद पार और राजिस्थान से हेरोइन, अफीम, चूरापोस्त, स्मैक और चरस पंजाब में आती है। पंजाब के अधिकांश ग्रामीण अफीम और चूरापोस्त का नशा करते हैं। यहां तक कि चूरापोस्त चाय में डालकर पीते हैं। यह ट्रेंड टीनएजर में काफी तेजी से बढ़ा है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक फिरोजपुर व फाजिल्का में छह माह में लगभग 235 चूरापोस्त, स्मैक, हेरोइन, अफीम व शराब के मामले दर्ज हैं।

नशे में डूबती पंजाब की युवा पीढ़ी

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