जम्मू। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती विधान परिषद में अलगाववादियों और उनका समर्थन करने वालों पर जमकर बरसीं। एक तरफ उन्होंने कश्मीरी पंडितों की वापसी का विरोध करने वालों को आड़े हाथ लिया। वहीं राज्य से धीरे-धीरे आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट को भी हटाने की वकालत की।

उन्होंने कश्मीर हिंसा और श्री बाबा अमरनाथ भूमि आंदोलन के प्रभावितों को मुआवजा देने और उनके जख्मों पर मल्हम लगाने की बात भी कही। उन्होंने जम्मू के लोगों की भी जमकर तारीफ की और कहा कि जम्मू में ही धारा 370 की रूह बसती है।

कश्मीर हिंसा पर हुई बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्सी के अंत और नब्बे के दशक के आरंभ में लाखों कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन करना पड़ा। अब जब उनकी वापसी की बात होती है तो अलगाववादी व कुछ मुख्य धारा के राजनीतिक दल भी इसका यह कह कर विरोध करते हैं कि इससे कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलाव आ जाएगा। उन्होंने कहा कि इसी सोच को बदलना है।

उन्होंने कहा कि संविधान ने जम्मू कश्मीर को स्पेशल स्टेटस दिया है। धारा 370 केवल शब्द नहीं है बल्कि यह कश्मीर की रूह थी जिसमें विभिन्न धर्मों और भाषा बोलने वाले लोग सद्भाव से रहते थे मगर अब लगता है कि धारा 370 करी रूह तो जम्मू में बसती है। जम्मू के लोगों ने हर चीज को सहारा दिया। यहां पर हर धर्म का व्यक्ति कहीं पर भी रह सकता है। कोई विरोध नहीं करता।

उन्होंने कहा कि कश्मीर हिंसा के दौरान सोलह हजार करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ। कई घायल हुए, कइयों की जान चली गई। इन सबकी सरकार ने ही जिम्मेदारी लेनी है और इन लोगों की सहायता भी सरकार नहीं करेगी तो कौन करेगा। उन्होंने 2008 में हुए बाबा अमरनाथ भूमि आंदोलन के प्रभावितों को मुआवजा देने की बात भी कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की जेल में मारे गए चमेल सिंह के परिवार की भी राज्य सरकार सहायता करेगी।

धारा 370 केवल शब्द नहीं है बल्कि यह कश्मीर की रूह थी: महबूबा मुफ्ती

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