दो सितंबर तक ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिल जाएगा। नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जिम्मेदार सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी की समिति ने सोमवार को इसकी घोषणा की।

समिति के अध्यक्ष ग्राहम ब्रेडी ने बताया कि डेविड कैमरन के इस्तीफे के ऐलान के बाद पैदा अनिश्चितता का माहौल खत्म करने के लिए नए नेता का चुनाव जल्द से जल्द किए जाने की जरूरत है। पिछले सप्ताह यूरोपीय संघ (ईयू) की सदस्यता को लेकर हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह में ब्रिटेन की जनता ने ब्रेक्जिट (ईयू से बाहर निकलना) का समर्थन किया था। इसके बाद कैमरन ने अक्टूबर तक प्रधानमंत्री पद छोड़ने की घोषणा की थी।

ब्रेडी ने मध्यावधि चुनाव की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि ईयू से बाहर निकलने की शर्तें तय होने के बाद ही चुनाव होंगे। गार्डियन के अनुसार बुधवार शाम से नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि दो से ज्यादा दावेदार हुए तो पहले चरण का चुनाव पांच जुलाई तक हो जाएगा। इसमें सबसे कम मत पाने वाले नेता दौर से बाहर हो जाएंगे।

लंदन के पूर्व मेयर बोरिस जॉनसन और गृह मंत्री थेरेसा मे इस पद की शीर्ष दावेदार हैं। गौरतलब है कि ईयू बाहर जाने की दो साल लंबी जटिल प्रक्रिया की शुरुआत के लिए जरूरी है कि लिस्बन संधि की धारा 50 के तहत ब्रिटेन सदस्य देशों को इसकी औपचारिक सूचना दे। लेकिन, कैमरन का कहना है कि उनका उत्तराधिकारी ही यह प्रक्रिया शुरू करेगा।

ब्रसेल्स में सम्मेलन आज

ईयू के इतिहास के अब तक के सबसे कटु सम्मेलनों में से एक मंगलवार को ब्रसेल्स में शुरू होगा। इससे पहले जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने ब्रिटेन को समूह से बाहर करने की प्रक्रिया में किसी तरह की जल्दबाजी का विरोध किया है। उन्होंने सोमवार को कहा कि ब्रिटेन के औपचारिक आवेदन दिए बिना उसे बाहर करने को लेकर सदस्य देशों के बीच कोई अनौपचारिक बातचीत नहीं होगी। ब्रेक्जिट से पैदा हालात पर चर्चा के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी भी ब्रसेल्स पहुंच गए हैं।

कार्नी के बचाव में जॉनसन

देश के आर्थिक भविष्य को लेकर जारी उहापोह का दौर खत्म करने के लिए ब्रिटेन के नेता भी सक्रिय हो गए हैं। वित्त मंत्री जॉर्ज ओस्बोर्न ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत और ब्रेक्जिट से पैदा हालातों से निपटने में सक्षम है। बोरिस जॉनसन ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर मार्क कार्नी का बचाव किया है।

टेलीग्राफ में रविवार को प्रकाशित एक लेख में उन्होंने कहा है कि कार्नी के नेतृत्व में बैंक ऑफ इंग्लैंड ने लाजवाब काम किया है। जनमत संग्रह खत्म हो चुका है, अब वे बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के अपना काम जारी रख सकते हैं। कार्नी और ओस्बोर्न ने कहा था कि ईयू से निकलने पर देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। इसके बाद से दोनों का इस्तीफा मांगा जा रहा था।

 

दो सितंबर तक मिल जाएगा ब्रिटेन को नया पीएम

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