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देश की अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ ली है। विकास दर वित्त वर्ष 2014-15 के 7.2 फीसदी के मुकाबले वित्त वर्ष 2015-16 में 7.6 फीसदी हो गई। चौथी तिमाही में विकास दर 7.9 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई, जो तीसरी तिमाही में 7.2 फीसदी थी। इस उपलब्धि में मैन्युफैक्चरिंग, पावर और माइनिंग सेक्टर की सबसे बड़ी भूमिका रही।

पिछले आंकड़ों में संशोधन

सरकार ने पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही के विकास दर के आंकड़े भी संशोधि किए हैं। पहली तिमाही की विकास दर 7.7 से संशोधित होकर 7.6 फीसदी, दूसरी तिमाही का आंकड़ा 7.6 से संशोधित होकर 7.5 फीसदी और तीसरी तिमाही की ग्रोथ रेट 7.3 से संशोधित होकर 7.2 फीसदी रह गई।

अनुमान से ज्यादा ग्रोथ

यस बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट शुब्धा राव के मुताबिक आर्थिक रफ्तार अनुमान से ज्यादा है। आगे मांग भी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में इस बात की गुंजाइश बढ़ रही है कि जल्द प्राइवेट सेक्टर के कैपेक्स (बाजार पूंजीकरण) में रिकवरी आएगी।

आगे सुधरेगा कृषि क्षेत्र

इंडिया रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट देवेंद्र कुमार पंत के मुताबिक तीसरी तिमाही से कृषि क्षेत्र का सकारात्मक असर पड़ेगा। लगातार दो साल सूखे के बाद इस बार अच्छे मॉनसून की भविष्यवाणी की बदौलत कृषि क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। इससे उद्योग और सेवा, दोनों में दोबारा मांग आएगी।

हमारी गति सबसे ज्यादा

विकास दर के इतने अच्छे आंकड़ों की बदौलत भारत ने सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का तमगा बनाए रखा है। 2011-12 की कीमतों के मुताबिक भारत की वास्तविक जीडीपी 113.5 लाख करोड़ रुपए की है। कृषि, फिशिंग सेक्टर में 1.2 फीसदी ग्रोथ रही है। माइनिंग सेक्टर में 7.4 फीसदी ग्रोथ रही। इसके 6.9 फीसदी रहने का अनुमान था। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ 9.5 फीसदी के अनुमान के मुकाबले 9.3 फीसदी रही। वित्त वर्ष 2016 में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन 2.4 फीसदी रहा।

चीन से काफी आगे

भारत ने आर्थिक विकास दर के मामले में चीन को काफी पीछे छोड़ दिया है। चौथी तिमाही के दौरान चीन की विकास की दर 6.7 फीसदी रही, जो 7 साल में सबसे कम है।

ब्याज दरें नहीं घटेंगी

विकास दर के अच्छे आंकड़ों के बीच रिजर्व बैंक 7 जून को मौद्रिक नीति की समीक्षा के तहत नीतिगत ब्याज दरें यथावत रख सकता है। आरबीआई फिलहाल बैंकों की ओर से ब्याज दरें घटाए जाने का इंतजार कर रहा है। मॉनसून की अच्छी भविष्यवाणी से इस साल कृषि क्षेत्र को सहारा मिल सकता है। ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।

8 प्रमुख उद्योगों का उत्पादन 8.5 फीसदी बढ़ा

अप्रैल में देश के 8 प्रमुख उद्योगों (कोर इंडस्ट्री) के उत्पादन 8.5 फीसदी बढ़ा, जबकि मार्च में यह दर 6.4 फीसदी रही थी। तमाम उद्योगों में कोर इंडस्ट्री की हिस्सेदारी करीब 38 फीसदी है।

देश की अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, GDP 8 फीसदी के करीब

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