यूपी में दूसरे चरण में कई दिग्गज नेताओं की किस्मत भी दांव पर है। जिनमें कैबिनेट मंत्री आजम खान, पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान, आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जितिन प्रसाद और कांग्रेस के इमरान मसूद शामिल हैं। रामपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खां चुनाव मैदान में हैं। मुस्लिम राजनीति का बड़ा चेहरा माना जाता है और अखिलेश कैबिनेट में मंत्री भी हैं। 68 साल के आजम खां राजनीति में पूरा ठसक भरा जीवन जीते हैं। याददाश्त के धनी आजम खां के बारे में आम हैं कि उन्हें दोस्त और दुश्मन की खरी पहचान है।

यह आजम की शख्सियत ही है कि रामपुर उन्हें चुनाव में निराश नहीं करता। मुलायम भी पूरा मान रखते हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश की नजर में वह अपना स्थान रखते हैं। 2012 के बाद से उ.प्र. के साढ़े चार मुख्यमंत्रियों में गिने जाते रहे और पत्नी ताजीन फातिमा राज्यसभा सांसद हैं। इतना ही नहीं 1989 से लेकर अबतक जब भी प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, उसमें आजमा खां कैबिनेट मंत्री जरूर बनाए गए। स्वार-टांडा विधानसभा सीट की लड़ाई इस बार दिलचस्प हो गया है। क्योंकि यहां से सपा-कांग्रेस गठबंधन ने कैबिनेट मंत्री आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम को मैदान में उतारा है। पहली बार अब्दुल्ला चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं बसपा से वर्तमान विधायक नवेद मियां फिर चुनाव मैदान में हैं।

गलगोटिया विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ टेक्नालोजी इन स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले अब्दुल्ला तब से सियासत में सक्रिय हैं, जब वह चुनाव भी लड़ सकते थे। पिछले लोकसभा चुनाव में वह प्रचार करते नजर आए थे। अपने पिता आजम खां द्वारा स्थापित जौहर विश्वविद्यालय के सीईओ भी हैं। अमरोहा जिले के नौगावां सादात विधानसभा सीट पर सबकी नजरें टिकी हुई है। क्योंकि यहां से पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। चेतन चौहान, निफ्ट के चेयरमैन भी रह चुके हैं। हालांकि, जावेद आब्दी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जो अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं। सपा के विधायक अशफाक अली को टिकट नहीं मिला तो वो रालोद के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं। तिलहर विधानसभा सीट से जितिन प्रसाद कांग्रेस-सपा गठबंधन के उम्मीदवार हैं। जितिन प्रसाद दो बार सांसद रहे हैं और वो जितेंद्र प्रसाद के बेटे हैं। राहुल गांधी की यंग ब्रिगेड टीम के जितिन प्रसाद प्रमुख चेहरे माने जाते हैं। तिलहर में जितिन के उतरने से समीकरण बदले हैं तो कटरा में भी इसकी संभावना बढ़ी है। लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अमर्यादित टिप्पणी कर चर्चाओं में आए कांग्रेस नेता इमरान मसूद नकुड़ सीट पर अपना भाग्य आजमा रहे हैं। वर्ष 2012 में कांग्रेस से ही मैदान में आए इमरान मसूद को बसपा के डॉ. धर्म सिंह सैनी ने पटखनी दी थी। तीन बार से बसपा से विधायक रहे डॉ. धर्म सिंह सैनी ने इस बार भाजपा का दामन थामा है।

ऐसे में उनके सामने हिंदू मतों को एकजुट करने की चुनौती है। कांग्रेस-सपा गठबंधन के इमरान मसूद मुस्लिम मतों के साथ ही हिंदू मतों में सेंधमारी करने में जुटे हैं। उधर, बसपा ने दलित-गुर्जर गठजोड़ के चलते नवीन चौधरी को मैदान में उतारा है। बसपा की परंपरागत सीट होने के नाते वह भी इसे हर हाल में अपने समीकरण को बनाए रखना चाहेंगे।

दूसरे दौर में इन दिग्गजों की किस्मत दांव पर

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